माइकल जैक्सन ‘किंग ऑफ पॉप’ कहलाए जाते थे. पुराने जमाने की मशहूर अभिनेत्री एलिजाबेथ टेलर ने एक समारोह में यहां तक कहा था, ‘माइकल जैक्सन इज किंग ऑफ पॉप, रॉक एंड सोल (रूह).’ 40 साल लंबे करियर में उनके गीतों, म्यूजिक वीडियोज और स्टेज शोज ने कमाई के हर रिकॉर्ड को तोड़ा था और 50 वर्ष की उम्र में दुनिया से विदा लेने वाले इस अफ्रीकी-अमरीकी कलाकार की मृत्योपरांत कमाई - सिर्फ साल 2016 की - 825 मिलियन डॉलर थी. ऐसा फोर्ब्स की एक सूची कहती है.

एमटीवी को भी माइकल जैक्सन की वजह से एक जमाने में बहुत कमाई और मशहूरियत नसीब हुई थी. अमेरिका में 1981 में लॉन्च हुआ एमटीवी, माइकल जैक्सन के एलबम ‘थ्रिलर’ (1982) की रिलीज के बाद घर-घर में पहचाना जाने लगा था और इस एलबम के तीन गानों पर बने म्यूजिक वीडियोज ने पूरे अमेरिका में तहलका मचा दिया. ‘बिली जीन’, ‘थ्रिलर’ व ‘बीट इट’ नामक इन वीडियोज में थिरकते-गाते 24 वर्षीय एमजे ने न सिर्फ उन डांस मूव्ज की झलक पहले-पहल दिखाई थी जिन्हें वे बाद में जग-प्रसिद्ध करने वाले थे, बल्कि एक टीवी शो के लिए 1983 में ‘बिली जीन’ गीत परफॉर्म करते वक्त, दुनिया ने पहली बार माइकल जैक्सन को ‘मून वॉक’ करते हुए देखा था.

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माइकल जैक्सन की जिंदगी के हर पहलू पर, हर कोण से पहले बात हो चुकी है – और काफी हो चुकी है! – लेकिन एक चीज है जिसके बारे में शायद ही ज्यादा लिखा-पढ़ी हुई हो. वो यह कि माइकल जैक्सन को चांद से बहुत प्यार था!

चांद के बिना जिनकी कविता, गीत और त्रिवेणियां अधूरी हैं, हमारे उन प्यारे गुलजार और माइकल जैक्सन में शायद यही एक समानता भी है!

मून वॉक का नाम मून वॉक क्यों पड़ा इसका कोई ठोस कारण नहीं है. माइकल जैक्सन से काफी पहले आए कलाकारों ने भी मून वॉक को अंजाम दिया था, और खुद माइकल ने इसे दूसरों से सीखा, लेकिन जब स्टेज पर किया तो संसार में सर्वश्रेष्ठ अंदाज में प्रस्तुत किया. इस मूव को उस वक्त तक कलाकारों के बीच ‘बैकस्लाइड’ नाम से जाना जाता था लेकिन जब ‘बिली जीन’ में एमजे को यह पहली बार करते देखने के बाद चकित लोगों ने उनसे पूछा कि यह क्या था, तो उन्होंने कहा मून वॉक!

चांद पर चलने का तरीका.

जैक्सन पर कई लोगों ने किताबें लिखी हैं. उन्हें निजी रूप से जानने वालों से लेकर उनकी इजाजत लेकर उन पर डाक्यूमेंट्री (‘लिविंग विद माइकल जैक्सन’) बनाने वालों तक ने अनेक खुलासे किए हैं. प्लास्टिक सर्जरी से लेकर यौन शोषण के आरोपों तक, इन किताबों-डॉक्यूमेंट्रीज में दर्ज कई बातें सिर्फ कही-सुनी बातें बनकर कभी साबित नहीं होने के बावजूद पब्लिक डिस्कोर्स का हमेशा से हिस्सा भी रहीं. लेकिन किताबों की इस भीड़ के बीच उस किताब पर चर्चा कम हुई जो खुद माइकल जैक्सन ने लिखी थी. जिसमें बचपन में अपने पिता द्वारा बरती गई हिंसा सहने से लेकर नाक की सर्जरी और ठोड़ी में डिंपल बनाने वाली प्लास्टिक सर्जरी तक का सिलसिलेवार जिक्र था.

1988 में आई इस आत्मकथा के नाम में भी चांद था! इसका नाम था ‘मूनवॉक’ और इसके बारे में दुनिया को तभी जानकारी हुई जब ये छपकर तैयार हो गई. इसमें छपी जानकारियों को छपने से पहले प्रचारित होने से बचाने के लिए प्रिंटिंग के वक्त इस किताब को एक कोडनेम भी दिया गया – नील आर्मस्ट्रांग. यानी कि वह पहला शख्स जो चांद पर वॉक करके आया था.

उसी साल, 1988 में माइकल जैक्सन ने खुद पर एक फिल्म बनाई जिसमें उन्होंने अपने कई पसंदीदा म्यूजिक वीडियोज को संकलित किया था. 92 मिनट की इस फीचर फिल्म का नाम ‘मूनवॉकर’ था.

चमड़ी की एक बीमारी के बाद खुद को चांद की तरह सुफेद बना लेने वाले माइकल जैक्सन के एक दोस्त हुआ करते थे, उरी गेलर. वे एक जादूगर थे और स्टील की चम्मचों को टेढ़ा करने के लिए आज भी ख्यात हैं. वे 2011 में आई किताब ‘माइकल जैक्सन : द आईकॉन’ में बताते हैं कि माइकल जैक्सन हमेशा से चांद पर जाना चाहते थे! 2005 में हजार एकड़ के करीब जमीन चांद पर खरीदने वाले जैक्सन पॉप वर्ल्ड के दूसरे कलाकारों से पहले वहां पहुंचना चाहते थे और अपने इस ख्वाब को लेकर इतने ज्यादा गंभीर थे कि न सिर्फ करोड़ों खर्च करने के लिए तैयार थे, बल्कि एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक तक के निरंतर संपर्क में थे.

लेकिन क्यों?

क्योंकि चांद पर जाकर माइकल जैक्सन, मून वॉक करना चाहते थे.

चांद पर अपने ही अंदाज में वॉक करने का उनका यह सपना कभी संभव नहीं हुआ लेकिन, 25 जून 2009 को प्राण त्यागने के कुछ दिनों बाद चांद पर मौजूद एक क्रेटर का नाम उनके नाम पर माइकल जोसफ जैक्सन जरूर रखा गया.