फैशन गुरू अक्सर यह टिप्स देते दिखते हैं कि अपने बॉडी टाइप के हिसाब से कपड़े पहनिए - अलां स्ट्रिप्स, फलां कट आपको पतला-मोटा या लंबा-छोटा दिखाई देने में मदद करेगा. लेकिन साड़ी इकलौता ऐसा परिधान है जो कैसे भी प्रिंट-डिजाइन-पैटर्न के साथ किसी भी शरीर पर फिट हो जाता है. अगर शरीर सुंदर है तो उसकी सुंदरता कई गुना और बढ़ जाती है और अगर कोई छोटा-मोटा ऐब है तो वह भी आसानी से छिप जाता है. इसके साथ यह भी है कि साड़ी कभी फैशन से बाहर नहीं होती है. कभी नए पैटर्न, नए डिजाइन के साथ तो कभी पहनने के अनूठे तरीकों के साथ यह हमेशा रेस में बनी रहती है. पिछले कुछ दिनों से ट्विटर पर हैशटैग ‘साड़ी ट्विटर’ ट्रेंड कर रहा है और इस बहाने यह सदाबहार भारतीय परिधान सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है.

साड़ी पहनने के कुछ परंपरागत तरीके हमेशा लोकप्रिय रहे हैं और इनमें जरा सा बदलाव लोगों की पहचान से जुड़ जाता है. कई बार साड़ी का फैब्रिक, रंग, डिजाइन और उसे लपेटने का तरीका, ये सब मिलकर सामने वाले के लिए आपके व्यक्तित्व की परिभाषा तय कर देते हैं. जैसे - पल्लू डालने का तरीका ही पहनने वाले के बारे में एक राय बनाने की वजह दे देता है. चलिए जानते हैं कि पल्लू डालने के तरीके से किसी महिला के बारे में आम लोगों के बीच क्या छवि बनती हैं-

सामान्य तरीका - साड़ी बांधने का यह तरीका आम बोलचाल की भाषा में उल्टे पल्लू की साड़ी पहनना कहा जाता है. कभी उल्टे पल्लू की साड़ी आधुनिकता की पहचान मानी जाती थी, लेकिन यह बहुत पुरानी बात है. बीते चार-पांच दशकों में साड़ी पहनने का यही तरीका सामान्य तरीका माना जाता है. पल्लू निकालते हुए इसमें नीचे की तहें करीब चार इंच चौड़ी रखी जाती हैं और सबसे ऊपर की परत को बस इतना बढ़ा दिया जाता है कि यह कंधे को पूरी तरह से ढक ले. अगर शिफॉन, जार्जेट या सिल्क की साड़ी इस अंदाज में पहनी जाए तो यह घरेलू लुक माना जाएगा जैसे कि आमतौर पर महिलाएं पहने नजर आती हैं.

ऊपर बताए गए तरीके से ही अगर कॉटन, कोटा सिल्क या हैंडलूम की साड़ियां पहनी जाती हैं तो यह औपचारिक वेशभूषा बन जाएगी. आमतौर पर शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी या एयर होस्टेस इसी तरह से साड़ी पहने दिखाई देती हैं. इसीलिए यह तरीका कॉर्पोरेट ड्रेप मेथड भी कहलाता है. यानी अगर कोई महिला इस तरीके साड़ी बांधती है तो उसे पेशेवर समझा जाएगा. इस तरह कहा जा सकता है कि एक ही तरीके से पहनी गई साड़ी के फैब्रिक का अंतर भर किसी को घरेलू तो किसी को पेशेवर बताने के लिए काफी है.

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चौड़ा पल्लू - साड़ी बांधने का यह तरीका भी सामान्य तरीके जैसा ही होता है. बस, इसमें पल्लू की ऊपरी तह इतनी बढ़ा दी जाती है कि वह आधे बाजू को कवर कर ले. बड़ी उम्र की महिलाएं इस तरह से साड़ी पहनना ज्यादा पसंद करती हैं. अगर किसी महिला ने कॉटन या सिल्क की साड़ी इस तरह चौड़े पल्लू के साथ पहनी है तो उसे देखने वाली नजरें यह अंदाजा लगाएंगी कि महिला कोई राजनेता या रसूखदार महिला है. सुषमा स्वराज या हेमा मालिनी का स्टाइल यही है.

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हैंगिंग या फॉलिंग पल्लू और बटरफ्लाई लुक – साड़ी पहनने के यह तरीका साड़ी के डिजाइन और हिसाब से ट्रेडिशनल और फॉर्मल दोनों तरह से लुक देता है. इसलिए किसी भी मौके पर ऐसे साड़ी पहनी जा सकती है. इस तरह से साड़ी पहनते हुए फैब्रिक का ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि यह स्टाइल तभी अच्छी लगती है जब कपड़ा शरीर से अच्छी तरह चिपका रहे. यही कारण है कि अक्सर जब फिल्मों में हिरोइन को ग्लैमरस और संस्कारी साथ-साथ दिखाना होता है तो उसे शिफॉन की साड़ी पहने हुए दिखाया जाता है. इस तरह से साड़ी बांधने वाली महिलाओं को भी इसी नजर से देखा जा सकता है.

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बटरफ्लाई लुक साड़ी बांधने का अपेक्षाकृत नया तरीका है और यह भी बॉलीवुड की देन है. युवा लड़कियों में यह खासा लोकप्रिय है क्योंकि इस तरह से साड़ी बांधने पर शरीर का शेप पूरी तरह से दिखाई देता है. यह भी फॉलिंग पल्लू की तरह फैशन परस्त महिलाओं का स्टाइल समझा जाता है. मध्यमवर्गीय महिलाओं, इनमें भी खासतौर पर नई दुल्हनों को ऐसे पल्लू डालते हुए देखा सकता है. यह जहां एक तरफ किसी को मॉडर्न और फैशन के प्रति जागरूक दिखाता है तो वहीं उसके चुलबुली लड़की होने वाली इमेज को भी बचाकर रख लेता है.

रफ स्टाइल - कुछ महिलाएं सूती साड़ियां लपेटकर बड़ी बेतरतीबी से पल्ले को कंधे पर छोड़ देती हैं. अक्सर सामाजिक कार्यकर्ता, नेता, साहित्यकार ऐसा करते हुए दिख जाती हैं. पर्यावरण प्रेमी मेधा पाटकर (नीचे तस्वीर) या सीपीएम की नेता नेता बृंदा करात इसका सबसे सटीक उदाहरण हैं. इस बेपरवाही भरे तरीके से साड़ी पहनना किसी भी महिला को बुद्धिजीवी वर्ग का हिस्सा दिखाता है. समझा जाता है कि यह महिला बहस-मुबाहिसों में हिस्सा लेने वाली और सक्रिय समाज का हिस्सा होगी.

अगर यह कपड़ा सूती, लिनेन या खादी होने के बजाय टेरीकॉट या पॉलिएस्टर है तो क्लास का ग्राफ धम से नीचे आ गिरता है. धोने में आसान होने के कारण इस तरह की साड़ियां मजदूर वर्ग की औरतें पहने नजर आती हैं. सलमा-सितारे और चमकदार कढ़ाई के साथ चटक रंग की ये साड़ियां कथित निचले तबके के हिस्से में आती है. हालांकि महंगे फैब्रिक में भी चटख रंग अब फैशन में है लेकिन उस पर की गई कढाई या स्टोन वर्क ज्यादा चमकदार नहीं होता.