प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन में आयोजित इफ्तार में नहीं गये और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईदगाह में जाकर ईद मुबारक नहीं कहा. दिल्ली से लेकर लखनऊ तक इन दो बातों की जबरदस्त चर्चा रही. जब भाजपा नेताओं से इसकी वजह पूछी गई तो औपचारिक तौर पर ज्यादातर लोगों ने यही कहा कि प्रधानमंत्री विदेश में व्यस्त थे और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ एशियन डेवलपमेंट बैंक की टीम की मेजबानी कर रहे थे. लेकिन जब बातचीत अनौपचारिक स्तर पर होती है तो इसकी एक वजह और पता चलती है.

भाजपा के कुछ नेताओं के मुताबिक यह उसकी एक सोची-समझी रणनीति है कि उसके कुछ शीर्ष नेता किसी भी सूरत में इफ्तार या ईद मिलन जैसे कार्यक्रमों में शरीक नहीं होंगे. इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस तरह की एक भी तस्वीर देख पाना बेहद मुश्किल है. जब गुजरात में नरेंद्र मोदी को एक मुस्लिम मौलाना ने टोपी पहनाने की कोशिश की थी तब भी उन्होंने ऐसा करने से इंकार कर दिया था.

उत्तर प्रदेश में योगी ने भी यही परंपरा शुरू की है. ऐसा पहली बार हुआ जब ईद के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री लखनऊ की ईदगाह नहीं गए. राम लहर में मुख्यमंत्री बने कल्याण सिंह भी ईद के दिन वहां जाने से परहेज नहीं किया करते थे. लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के बजाय उपमुख्यमंत्री इस समारोह में शरीक हुए. इसके उलट उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक वहां मौजूद थे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी.

राष्ट्रपति भवन से विदा लेने से पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी इफ्तार की दावत दी थी. राष्ट्रपति भवन की तरफ से प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के मंत्रियों को न्योता भेजा गया था. चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश यात्रा पर थे इसलिए उनका न आना समझा जा सकता है लेकिन इस इफ्तार में केंद्र सरकार का कोई मंत्री भी शामिल नहीं हुआ.

मोदी सरकार में तीन साल में ऐसा तीसरी बार हुआ है - राष्ट्रपति भवन से इफ्तार का बुलावा आया लेकिन प्रधानमंत्री उसमें शामिल नहीं हुए. सुनी-सुनाई ही है कि प्रधानमंत्री कार्यालय को यह मौखिक निर्देश है कि कोई ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे राष्ट्रपति भवन से आए न्योते की गरिमा भी रह जाए और प्रधानमंत्री के मन की बात भी. राष्ट्रपति भवन के इफ्तार में अब से पहले मोदी सरकार के मंत्री जरूर शरीक होते थे, लेकिन इस बार वे भी नहीं गए. सुनी-सुनाई है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से ही उनसे ऐसा करने के लिए कहा गया था.

रमजान के दौरान दिल्ली में सियासी इफ्तार पार्टियां खूब होती रही हैं. लेकिन अब इनका रंग लगातार फीका होता जा रहा है. यहां तक कि मोदी सरकार के दो मुस्लिम मंत्रियों – मुख्तार अब्बास नकवी और एमजे अकबर - ने भी इस बार इफ्तार का आयोजन नहीं किया. ईद के दिन मुख्तार अब्बास नकवी के घर मुबारकबाद देने जरूर कुछ मंत्री पहुंचे, लेकिन यहां भी उन्होंने टोपी पहनने और फोटो खिंचाने से परहेज किया. ऐसे में कुछ लोगों को लग सकता है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा जिस तरह की छवि अपने लिए गढ़ना चाहती है शायद टोपी पहनना और फोटो खिंचाना उससे मेल नहीं खाता.