अगर संभावना सच साबित हुई ताे त्रिपुरा जैसे राज्य में भी भारतीय जनता पार्टी का खाता खुलना तय है. वह भी चुनाव के बिना. त्रिपुरा में 1993 से लगातार वाम दलों की सरकार है और कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), भाजपा जैसे दल यहां अभी अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराने के लिए संघर्ष ही कर रहे हैं. फिलहाल यहां टीएमसी के छह विधायक हैं. पर द इंडियन एक्सप्रेस ने जो ख़बर दी है उसके मुताबिक ये सभी विधायक जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं.

ख़बर के मुताबिक राष्ट्रपति चुनाव में त्रिपुरा के टीएमसी विधाायकों ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का एलान किया है. जबकि उनकी पार्टी संयुक्त विपक्ष की उम्मीदवार पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को समर्थन कर रही है. और अब जैसा कि सूत्र बताते हैं, ‘इसी महीने के अंत तक टीएमसी के ये सभी विधायक भाजपा के पाले में आ सकते हैं. चूंकि टीएमसी के विधायक एक साथ पार्टी बदल रहे हैं इसलिए वे दल-बदल विरोधी कानून के तहत होने वाली कार्रवाई से भी बच जाएंगे.’

ग़ौरतलब है कि टीएमसी विधायकों द्वारा पार्टी लाइन से अलग जाकर काेविंद काे समर्थन देने का ऐलान करने के बाद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने त्रिपुरा के प्रभारी मुकुल रॉय को हटा दिया था. जबकि भाजपा के प्रवक्ता मृणाल कांति देब ने इन विधायकों के फैसले को ‘सही समय पर लिया गया उचित फैसला’ बताया था. अख़बार से बातचीत में देब ने कहा था, ‘टीएमसी विधायकों ने दीवार पर लिखी इबारत पढ़ ली है.’ हालांकि जब इन विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाबत उनसे सवाल किया तो उन्होंने इसका कोई ज़वाब नहीं दिया.

वैसे जिन विधायकाें के भाजपा में आने की संभावना ज़ताई जा रही है वे 2016 में भी पार्टी बदल चुके हैं. ये सभी उस वक़्त कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में आए थे.