केंद्र सरकार एक ऐसा सिस्टम बनाने जा रही है जिससे चोरी या गुम हुआ फोन नया सिम डाले जाने पर एक्टिवेट नहीं होगा. साथ ही इससे यूजर्स का प्राइवेट डेटा चोरी होने से बच जाएगा. दूरसंचार विभाग ने बीते मंगलवार को एक नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि भारत संचार निगम लिमिटेड पुणे में सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिफाई रजिस्टर नाम से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है. इसके तहत आईएमईआई नंबर की रजिस्ट्री बनाई जाएगी. यह एक केंद्रीय व्यवस्था की तरह काम करेगी जिसमें सभी मोबाइल फोन कंपनियां चोरी या गुम हुए फोन का डेटा शेयर कर सकेंगी. बताया जाता है कि यह सिस्टम बनने के बाद चोरी या गुम हुआ फोन नया सिम डाले जाने पर एक्टिवेट नहीं होगा.

दूरसंचार विभाग के एक बयान में कहा गया है, ‘मोबाइल फोन की चोरी और क्लोनिंग गंभीर समस्या बन गई है. यह लोगों की निजी जिंदगी और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बन गया है. हमारे मोबाइल नेटवर्क में फर्जी आईएमईआई नंबर वाले बहुत से नकली फोन एक्टिव हैं. ये पॉपुलर ब्रांड और मॉडल की गैरकानूनी तरीके से बनाई कॉपी हैं. इसके चलते कंज्यूमर को दी जाने वाली सर्विस की क्वॉलिटी खराब होती है.’

डिपार्टमेंट के अनुसार उसकी इस नई योजना का व्यापक उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना, नकली मोबाइल फोन मार्केट पर शिकंजा कसना, मोबाइल फोन की चोरी पर लगाम लगाना, फोन क्लोनिंग को पकड़ना और जरूरत पड़ने पर वैध टैपिंग की इजाजत देना है.

अब फेसबुक आपको फ्री वाई-फाई का पता बताएगी

अब किसी भी शहर में जाने पर आपको फ्री वाई-फाई खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक आपको फ्री वाई-फाई का पता बताएगी. फेसबुक ने अपने ‘फाइंड वाई-फाई’ फीचर की सुविधा दुनिया भर के दो अरब से अधिक आईओएस और एंड्रायड यूजर्स को मुहैया कराने का फैसला किया है.

फेसबुक के इंजीनियरिंग डायरेक्टर एलेक्स हिमेल ने कुछ दिन पहले अपने ब्लॉग के जरिये यह जानकारी दी है. उन्होंने लिखा, ‘हम अपने फीचर फाइंड वाई-फाई को पूरी दुनिया में आईओएस और एंड्रायड यूजर्स तक विस्तार देने के लिए तैयार हैं. हमने पिछले साल इसे कुछ चुनिंदा देशों में शुरू किया था.’

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हिमेल के अनुसार ये फीचर यूजर्स को आस-पास मौजूद वाई-फाई हॉटस्पॉट को खोजने में मदद करता है. वे लिखते हैं, ‘आप चाहे जहां भी हों, अगर आपका मोबाइल डेटा नेटवर्क अच्छा नहीं है तो आप नजदीक में वाई-फाई हॉटस्पॉट कनेक्शन खोज सकते हैं.’

अब पानी में फ्लोराइड की मात्रा का पता घर बैठे एक मिनट में

अब पानी में फ्लोराइड के स्तर की जांच घर बैठे की जा सकती है और वह भी महज दस रुपये की एक किट की मदद से. हिमाचल प्रदेश स्थित आईआईटी मंडी के विशेषज्ञों ने अपने एक शोध के जरिए इस किट को बनाने में सफलता पाई है. संस्थान के मुताबिक नवंबर 2016 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने संस्थान को फ्लोराइड की मात्रा जांचने के लिए एक किट के शोध की जिम्मेदारी सौंपी थी. इसके बाद से यहां के तीन विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र कुमार शर्मा, डॉ. अजय सोनी और महेश सोनी इस शोध पर लगे हुए थे.

संस्थान के अनुसार इन लोगों ने महज आठ माह में यह शोध पूरा करते हुए एक ऐसी किट तैयार की है जो पानी में फ्लोराइड की मात्रा एक मिनट में बता देती है. इस किट को अमेरिका की डेंटल एसोसिएशन और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ने हरी झंडी भी दिखा दी है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यह किट भारत के ग्रामीण क्षेत्र में बहुत ही कारगर साबित होने वाली है क्योंकि, इन क्षेत्रों में लोग फ्लोराइड की जांच के लिए सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग पर निर्भर रहते हैं.

पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा से फ्लोरोसिस नामक बीमारी होती है. इसका असर खासकर दांतों और हड्डियों पर पड़ता है, साथ ही इसके प्रभाव से अन्य रोग भी पैदा हो जाते हैं. अधिक फ्लोराइड गर्दन, पीठ, कंधे व घुटनों के जोड़ों व हड्डियों को प्रभावित करता है. इससे कैंसर, स्मरण शक्ति कमजोर होना, गुर्दे की बीमारी व बांझपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.