सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कानून न होने पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक बुधवार को सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार से शीर्ष अदालत ने कहा है, ‘संसद द्वारा इस बारे में कानून न बनाने की जो भी वजह हो, लेकिन अदालत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को निष्पक्ष बनाने के लिए कदम उठा सकती है.’ चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने यह भी कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता होना जरूरी है, क्योंकि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने जैसा महत्वपूर्ण काम करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 की एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है. रिपोर्ट के मुताबिक इसमें याचिकाकर्ता ने चुनाव आयुक्त नियुक्त करने में सरकार को मिले कार्यकारी अधिकार को समाप्त करने और इसकी जगह एक उच्चस्तरीय समिति बनाने की मांग की है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष शामिल हों. मौजूदा व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सिफारिश के आधार पर राष्ट्रपति चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करता है. एक दिन पहले ही अचल कुमार जोती को नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है जो गुरुवार को मौजूदा चुनाव आयुक्त नसीम जैदी की जगह लेंगे.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक शीर्ष अदालत ने दो महीने बाद इस मामले की विस्तृत सुनवाई करने का फैसला किया है. हालांकि, अगली सुनवाई जस्टिस जगदीश सिंह खेहर के उत्तराधिकारी जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी. चीफ जस्टिस खेहर अगस्त में रिटायर हो रहे हैं.