सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और उनके दो एनजीओ के बैंक खातों पर लगी पाबंदी हटाने के बारे में फैसला सुरक्षित रख लिया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक बुधवार को जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविल्कर की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की है. इस दौरान गुजरात सरकार ने आरोप लगाया कि तीस्ता सीतलवाड़ ने एनजीओ को मिले अनुदान का उपयोग अपने निजी खर्चों को पूरा करने जैसे शराब आदि की खरीद में किया था.

रिपोर्ट के मुताबिक तीस्ता सीतलवाड़ ने गुजरात सरकार के आरोपों के जवाब में दलील दी है कि उनके निजी खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है. उनके मुताबिक सरकार उन्हें परेशान कर रही है. तीस्ता ने अदालत में सफाई दी है, ‘सात साल में शराब पर केवल 7,850 रुपये खर्च किए गए. इस खर्च को फोर्ड फाउंडेशन की मंजूरी थी, जो संस्थाओं को अनुदान देता है.’ फिलहाल शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों से अपनी राय लिखित में देने का निर्देश दिया है.

यह मामला तीस्ता सीतलवाड़ और अन्य लोगों पर गुजरात दंगे में मारे गए लोगों की याद में गुलबर्ग सोसाइटी को संग्रहालय बनाने के लिए मिले अनुदान में अनियमितता की शिकायत से जुड़ा है. यह शिकायत गुलबर्ग सोसाइटी के निवासियों ने दर्ज कराई थी. इसकी जांच करते हुए पुलिस ने उनके और उनके एनजीओ- सबरंग ट्र्स्ट और सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस के बैंक खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी थी. तीस्ता सीतलवाड़ ने बैंक खातों से रोक हटाने के लिए गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाई थी. इसके बाद उन्होंने सात अक्टूबर 2015 को गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी.