विपक्षी दलों के विरोध के बीच जम्मू और कश्मीर विधानसभा ने राज्य में वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू करने का संकल्प बुधवार को पारित कर दिया. राज्य में छह जुलाई यानी गुरुवार से इसके लागू होने की उम्मीद है. इससे पहले जम्मू और कश्मीर को छोड़कर बाकी राज्यों में अप्रत्यक्ष कर की नई व्यवस्था जीएसटी एक जुलाई से ही लागू हो गई है.

बुधवार को राज्य विधानसभा के दो दिवसीय विशेष अधिवेशन में राज्य के वित्त मंत्री हसीब द्रबू ने जीएसटी पर संकल्प प्रस्ताव पेश किया. जोरदार बहस के बाद इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई. विपक्षी नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और माकपा ने हालांकि जीएसटी के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया.

जीएसटी को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए द्रबू ने कहा कि संकल्प प्रस्ताव में केंद्र सरकार से अपील की गई है कि वह जीएसटी लागू करते वक्त राज्य के विशेष दर्जे और कर लगाने के अधिकार का सम्मान करे. विपक्षी दलों की चिंता का समाधान करते हुए उन्होंने कहा कि यदि जीएसटी कानून के बहाने केंद्र सरकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 या राज्य संविधान की धारा-5 की अनदेखी करेगी तो वे विधानसभा में लौटकर नहीं आएंगे.

उन्होंने कहा कि एक जुलाई से देश में जीएसटी लागू होने के बावजूद जम्मू और कश्मीर में इसके लागू न होने से राज्य में कारोबार लगभग आधा रह गया है. द्रबु ने कहा कि पिछले साल चार जुलाई को राज्य में दो हजार ट्रकों ने सामान लेकर प्रवेश किया था, लेकिन इस चार जुलाई को केवल एक हजार ट्रक ही राज्य में प्रवेश कर पाए. उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों में जाने वाले ट्रकों की संख्या भी पिछले साल के मुकाबले घटकर महज आधी रह गई है. वित्त मंत्री के अनुसार इस वजह से इस चार जुलाई को राज्य का राजस्व पिछले साल के इसी दिन के 82 करोड़ की तुलना में घटकर महज 40 करोड़ रह गया. उन्होंने सदन से जीएसटी कानून पारित करने की अपील करते हुए कहा कि बिना जीएसटी के कारोबार और राजस्व दोनों को काफी नुकसान होगा.