केंद्र सरकार ने उत्पादकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि पहले के बचे माल पर जीएसटी लागू होने के बाद की दरें नहीं छापी गईं तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने शुक्रवार को कहा कि दोषी उत्पादकों को जेल की सजा समेत एक लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है.

राम विलास पासवान ने कहा, ‘हमने कंपनियों से बचे हुए माल पर बदला हुआ मूल्य छापने को कहा है. नए एमआरपी का स्टिकर लगाया जाना चाहिए ताकि ग्राहक जीएसटी के बाद दरों में आए बदलाव को जान सकें.’ उन्होंने बताया कि बचे हुए माल पर संशोधित एमआरपी प्रकाशित करना अनिवार्य है और ऐसा नहीं करने पर ‘पैकेटबंद उत्पाद नियम’ का उल्लंघन माना जाएगा. पासवान ने कहा कि इसका पालन नहीं करने वालों पर पहली बार 25 हजार रुपये, दूसरी बार 50 हजार रुपये और तीसरी बार एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. इसके साथ ही एक साल तक की जेल भी हो सकती है. उन्होंने कहा कि उत्पादकों को न सिर्फ सामान पर छापी गई नई कीमत के बारे में सरकार को जानकारी देनी चाहिए बल्कि ग्राहकों की जागरूकता के लिए विज्ञापन भी देना चाहिए.

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि उत्पादकों को सितंबर तक बचे हुए माल को निकालने की अनुमति दी गई है. वहीं जीएसटी पर उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की एक समिति बनाई गई है. उपभोक्ता मंत्रालय ने जीएसटी से संबंधित सवालों के जवाब के लिए हेल्पलाइनों की संख्या 14 से बढ़ाकर 60 कर दी है. राम विलास पासवान ने दावा किया कि जीएसटी को लागू करने को लेकर शुरुआती अड़चनें थीं लेकिन उनका जल्द ही समाधान हो गया.