प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मनी के हैम्बर्ग में आयोजित जी-20 सम्मेलन में आतंकवाद समर्थक देशों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर ठोस कार्रवाई की अपील की है. उन्होंने ऐसा करने वाले देशों के अधिकारियों के जी-20 में प्रवेश पर रोक लगाने की वकालत भी की है. प्रधानमंत्री मोदी ने जी-20 से आतंकवाद को वित्तीय मदद और सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराने वालों का सामूहिक तौर पर विरोध करने पर भी जोर दिया. उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान का नाम लिए बिना ही कहा कि कुछ देश राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आतंकवाद का एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) और अलकायदा के साथ लश्कर-ए तैयबा, जैश-ए मोहम्मद जैसे समूहों को बड़ा आतंकवादी संगठन बताया. उन्होंने कहा कि नाम भले ही अलग-अलग हों लेकिन, इन संगठनों की विचारधारा एक है. भारतीय प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ 11 सूत्रीय एक्शन प्लान भी पेश किया. इसमें जी-20 देशों के बीच आतंकियों की सूचियों के आदान-प्रदान, प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया को आसान बनाने और आंतकी संगठनों को वित्तीय मदद और हथियारों की आपूर्ति पर अंकुश लगाने जैसे कदम शामिल हैं.

खबरों के मुताबिक जी-20 के सदस्य देशों ने आतंकियों को शरण देने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प लिया है. साथ ही उन्होंने इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ के फैलाव को रोकने की भी बात कही है. जी-20 अर्थव्यवस्था के लिहाज से विश्व के सबसे बड़े 19 देशों और यूरोपीय संघ का समूह है.