चाइना की प्रमुख कार निर्माता कंपनी एसएआईसी ने घोषणा की है कि वह 2019 तक भारतीय बाजार में दाखिल हो सकती है. हालांकि अभी तक एसएआईसी ने यह खुलासा नहीं किया है कि वह अपनी कौन सी कारों के साथ भारत का रुख करेगी, लेकिन कंपनी द्वारा उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह देश के कार बाजार में अपने ब्रिटिश ब्रांड एमजी मोटर्स के तहत उतरेगी. एमजी मोटर्स 2014 में आयोजित ब्रिटिश टुअरिंग कार मैन्युफैक्चरर्स चैंपियनशिप को जीत कर वहां के कार बाजार में चर्चित नाम बन चुकी है.

जानकारों द्वारा संभावना जताई गयी है कि भारत में एमजी मोटर्स अपनी तीन प्रमुख कारों के साथ पारी की शुरुआत कर सकती है. इनमें हैचबैक एमजी-3 और एसयूवी एमजी जीएस के साथ कंपनी की अगली कॉम्पेक एसयूवी एमजी एक्सएस या ज़ेडएस शामिल हैं.

अगर एमजी-3 की बात करें तो यह कार ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बाजारों में अपनी पहचान बनाने में सफल रही है. इसका 1.5 लीटर इंजन इसे 106 पीएस की अधिकतम पॉवर देता है. साथ ही तकरीबन चार मीटर लंबाई के साथ यह कार उस सेगमेंट में फिट नजर आती है जिसमें देश के कार बाजार में पहले से फॉक्सवैगन पोलो और मारुति सुजुकी नेक्सा की बलेनो मौजूद हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि एमजी मोटर्स इन दोनों कारों को टक्कर देना चाहती है तो उसे एमजी-3 को खासे फीचर्स और आकर्षक कीमतों के साथ भारतीय बाजार में उतारना होगा.

एमजी जीएस की बात करें तो 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन से लैस यह कार साइज और लुक्स में कुछ-कुछ ह्युंडई टूसॉन जैसी ही है. जानकारों के मुताबिक यदि एजी मोटर्स जीएस को भारत में उतारना चाहती है तो उसे पेट्रोल के साथ डीज़ल इंजन भी लाना होगा. एमजी की तीसरी गाड़ी एक्सएस या जेडएस अभी लॉन्च नहीं हुई है. लेकिन बताया जा रहा है कि इसे दो पेट्रोल इंजन विकल्पों के साथ जीएस के प्लेटफॉर्म पर तैयार किया जाएगा. फिलहाल भारत-चीन के बनते-बिंगड़ते रिश्तों के बीच एसएआईसी की यह घोषणा दोनों तरफ के व्यापार से जुड़े लोगों के लिए उम्मीद और राहत साथ लेकर आयी है.

इलेक्ट्रिक कारों के प्रमोशन के लिए सरकार को सचिन तेंदुलकर का साथ मिला

2030 तक भारतीय बाजार से पेट्रोल-डीज़ल की कारों को हटाने और इलेक्ट्रिक कारों पर पूरी तरह से निर्भर होने की केंद्र सरकार की योजना को अब महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का साथ मिल गया है. मारूति 800 से लेकर बीएमडब्ल्यू आई-8 जैसी कारें चला चुके तेंदुलकर ने सरकार के इस कदम का मजबूत समर्थन किया है.

भारत में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक ईंधन और ईको फ्रेंडली यातायात साधनों से जुड़े एक इंटरव्यू में सचिन ने सरकार के इस कदम को स्वागत योग्य बताया है. इस बारे में तेंदुलकर का कहना था, ‘यह मौजूदा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह धरती को बचाए और यह सुनिश्चित करे कि अगली नस्लों को पृथ्वी बेहतर हाल में मिले.’

सचिन तेंदुलकर का मानना है कि वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली गाड़ियों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए
सचिन तेंदुलकर का मानना है कि वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली गाड़ियों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए

अपने बयान में सचिन तेंदुलकर ने यह भी जोड़ा कि सरकार ने सही दिशा में कदम उठाया है. उन्होंने कहा, ‘हालांकि यह एक रात में होने वाला नहीं है. पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल आवागमन के साधनों को विकसित करने में अभी लंबा समय लगेगा. लेकिन इस दिशा में काम करने का लिए यह सही समय है. यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे टेस्ट मैच में एक लंबी इनिंग खेलना.’

बताया जा रहा है कि सचिन जैसे लोकप्रिय खिलाड़ी के इलेक्ट्रिक कारों का समर्थन करने से सरकार को निश्चित तौर पर फायदा मिलेगा. लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो तो भारत जैसे देश में जहां अभी तक हजारों गांवों तक बिजली नहीं पहुंची है, वहां इस तरह की उम्मीदें दूर की कौड़ी हैं. उनके मुताबिक सरकार की यह पहल नार्वे, नीदरलैंड और जर्मनी की महज नकल मात्र है जो बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के क्षेत्र में भारत से कहीं आगे हैं.

होंडा ने भारत में अपनी एमयूवी मोबिलियो की बिक्री बंद करने की घोषणा की

जापान की प्रमुख कार निर्माता कंपनी होंडा ने भारत में अपने मल्टीयूटिलिटी व्हीकल यानी एमयूवी मोबिलियो की बिक्री बंद करने का फैसला लिया है. इससे पहले मार्च में कंपनी ने मोबिलियो का प्रोडक्शन बंद कर दिया था.

जानकारों का कहना है कि गला काट प्रतिस्पर्धा के बीच मोबिलियो ग्राहकों को अपनी तरफ लुभाने में असफल साबित रही. आंकड़ों की मानें तो पिछले कई महीनों में होंडा मोबिलियो की एक भी यूनिट नहीं बिकी.

कंपनी ने भारत में इस कार को अब से ठीक तीन साल पहले यानी जुलाई 2014 में मारुति की अर्टिगा की टक्कर में उतारा था. लेकिन इसके मुकाबले यह कार बुरी तरह से पिछड़ गयी. जहां एक तरफ अर्टिगा अपने सेगमेंट में बिक्री के नए कीर्तिमान स्थापित करने की डगर पर है, वहीं तीन साल में मोबिलियो की सिर्फ 40,789 यूनिट बिक पायी हैं.

होंडा ने मोबिलियो को अपनी हैचबैक ब्रियो के प्लैटफॉर्म पर तैयार किया था जिसके दोनों इंजन (पैट्रोल और डीज़ल) कंपनी के लोकप्रिय मॉडल सिटी से लिए गए थे. मोबिलियो का प्रोडक्शन बंद करने के पीछे होंडा ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है.