सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट से दोहरा झटका लगा है. सोमवार को शीर्ष अदालत ने उन्हें और उनके पति जावेद आनंद को गुजरात दंगों के पीड़ितों की सहायता के लिए पैसों के दुरुपयोग के मामले में राहत देने से इनकार कर दिया. आउटलुक के मुताबिक उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने कहा कि इस मामले में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, इसलिए उन्हें निचली अदालत में ट्रायल का सामना करना होगा. इस याचिका में तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति ने अपने और अपने एनजीओ (सबरंग ट्रस्ट और सिटीजन फॉस जस्टिस एंड पीस) के बैंक खातों पर लगी रोक को हटाने की मांग की थी.

वहीं, 2005 के कब्र खोदने के एक मामले में भी तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल पाई है. इस मामले में एफआईआर रद्द करने की मांग करने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि उन्हें ट्रायल का सामना करना पड़ेगा. यह मामला उनके एनजीओ सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस द्वारा गुजरात के पंचमहल जिले में गुजरात दंगा पीड़ितों के 28 अज्ञात शवों को कब्र खोदकर बाहर निकालने से जुड़ा है. यह कवायद एनजीओ के तत्कालीन समन्वयक रईस खान के नेतृत्व में चली थी. बाद में रईस खान ने कहा था कि उन्होंने तीस्ता सीतलवाड़ के कहने पर कब्र से शवों को निकाला था.

इस मामले की एफआईआर में लूनावाड़ा पुलिस ने 2011 में तीस्ता सीतलवाड़ का नाम ‘फरार आरोपित’ के तौर पर शामिल किया था. तीस्ता सीतलवाड़ ने इसे गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. उनकी दलील थी कि पुलिस ने उन्हें गवाह बनाने के बजाय फंसाने का काम किया है.