‘रविवार, 29 दिसंबर 2014. जी सिनेमा पर हर दूसरे इतवार की तरह हम साथ-साथ हैं दिखाई जा रही थी. हर दूसरे इतवार को इसलिए क्योंकि एक इतवार को हम आपके हैं कौन दिखाई जाती थी. इन दोनों ही फिल्मों में आलोक नाथ ने बाबूजी की भूमिका निभाई है. जिनके पास करने को कुछ और नहीं था वे यह फिल्म देख रहे थे. उनमें से कुछ ट्विटर यूजर्स भी थे जिनमें से कुछ के पास फॉलोअर्स की अच्छी-खासी संख्या थी. उन्होंने आलोक नाथ के संस्कारी बाबूजी होने और हमेशा कन्यादान करने का सपना देखने पर चुटकुले बनाने शुरू कर दिए. सवाल-जवाबों की वेबसाइट कोरा डॉट कॉम पर एक सवाल के जबाव में कोरा यूजर द्वारकानाथ प्रभु यह बताते हैं. सवाल था - आलोक नाथ में ऐसा क्या है जिसने उन्हें बिना कुछ किए रातों-रात सोशल मीडिया का सबसे ट्रेंडिंग टॉपिक बना दिया.

आलोक नाथ पर बना पहला चुटकुला था – हमारे देश ने हार्ट अटैक के बारे में जो भी सीखा है, आलोक नाथ से सीखा है. यह 29 दिसंबर 2014 को ट्वीट किया गया था. ट्विटर ट्रेंड्स का लेखा-जोखा रखने वाली एक वेबसाइट के अनुसार इसके अगले तीस दिन में आलोक नाथ से जुड़े करीब 43 हजार ट्वीट्स किए गए. समाचार वेबसाइटों पर इस दौरान प्रकाशित कुछ खबरों को खंगालने पर इसकी एक दूसरी वजह भी पता चलती है. इनके अनुसार लोकप्रिय कॉमेडियन कपिल शर्मा ने अपने टीवी-शो में आलोक नाथ के संस्कारी बाबूजी की भूमिकाएं करने पर कुछ मजेदार कमेंट किए थे. यह ट्विटर यूजर्स को भा गया और मौका मिलने पर उन्होंने बाबूजी पर चुटकुलों की भरमार कर दी.

आमतौर पर अचानक से सोशल मीडिया पर छा जाने वाली हस्तियां यहां पर कुछ ही दिनों की मेहमान होती हैं. ऐसा अक्सर तब होता है जब कोई अजीबो-गरीब बयान देता है या कोई बड़ा कारनामा कर दिखाता है. जब तक वह बयान या खबर चर्चा में रहते हैं, वह व्यक्ति ट्रेंडिंग लिस्ट का हिस्सा बना रहता है. पिछले दिनों राष्ट्रपति पद के अप्रत्याशित उम्मीदवार बनाए गये रामनाथ कोविंद के साथ भी ऐसा ही हुआ. वे कुछ दिन चर्चा में रहे और अब उससे बाहर हैं. लेकिन आलोक नाथ इस मामले में अपवाद है. वे भले ही बेवजह चर्चा में आ गए हों लेकिन सोशल मीडिया पर लोकप्रियता उन्हें स्थाई मिली है. उनसे पहले ऐसी लोकप्रियता सिर्फ रजनीकांत को ही मिली थी.

रजनीकांत और आलोक नाथ पर बनने वाले चुटकुलों की अगर तुलना की जाए तो रजनीकांत पर बनने वाले ज्यादातर जोक्स हॉलीवुड एक्टर चक नॉरिस पर बने चुटकुलों का भारतीयकरण हैं. वहीं आलोक नाथ पर बने चुटकुले अति-भारतीय होने के कारण भी विशेष हैं. रजनीकांत अचानक से लोकप्रिय नहीं हुए लेकिन आलोक नाथ ने रातों-रात यह शोहरत पाई. तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण अंतर दोनों में यह है कि रजनीकांत ने जहां खुद पर बनने वाले चुटकुलों पर मुस्कुराने के अलावा कुछ नहीं किया वहीं आलोक नाथ ने अपनी इस छवि का जमकर फायदा उठाया है: एआईबी के एक स्पूफ वीडियो में वे अरविंद केजरीवाल के स्पिरिचुअल गुरू बने नजर आए थे, जिसे करीब एक हफ्ते में ही सोलह लाख लोगों ने देखा था. यूट्यूब पर उनका एक संस्कारी रैप सॉन्ग भी मौजूद है. और डैट्सन गो के विज्ञापन में भी वे अपनी अंदाज में नई परंपरा की बात करते दिखाई दिए थे.

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सोशल मीडिया के लिए बाबूजी का मतलब अब आलोक नाथ ही हैं. उनके नाम से सैकड़ों फेसबुक पेज और ट्विटर अकाउंट चलाए जा रहे हैं. हर दिन जाने उनके जाने कितने मीम्ज बनाए जाते हैं जिन्हें फेसबुक के साथ-साथ व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर भी शेयर कर उनसे खूब मजे लिए जाते हैं. फेसबुक पर आलोक नाथ मीम्ज लिखकर सर्च करने पर करीब पचास से ज्यादा पेज खुलते हैं. यहां एक मजेदार बात यह भी है कि जब पहली बार आलोक नाथ अचानक ही ट्विटर का ट्रेंडिंग टॉपिक बने थे तब वे खुद ट्विटर का इस्तेमाल नहीं करते थे. कुछ एक मौकों को छोड़ दें - जब अपनी संस्कारी छवि के उलट उन्होंने एकाध ट्वीट में कुछ ऐसा कह दिया था जो उनके प्रशंसकों को पसंद नहीं आया - वे अब भी यहां ज्यादा सक्रिय नहीं हैं. साथियों का काम, मेडिकल इमरजेंसी और कुछ मजेदार ट्वीट्स को रिट्वीट करने के अलावा वे यहां पर कुछ खास नहीं करते. फिर भी उनके अकाउंट से इस बात का स्पष्ट पता चल जाता है कि वे मोदी सरकार के प्रशंसक हैं.

साल 1981 में जब वे रिचर्ड एटनबरो की फिल्म गांधी में काम करने के लिए आलोक नाथ दिल्ली से मुंबई आ रहे थे तब उन्होंने यह तो बिल्कुल नहीं सोचा होगा कि एक दिन वे गांधीजी की तरह, सोशल मीडिया के लिए ही सही, नैतिकता और संस्कारों की मिसाल बन जाएंगे. आज 61 साल के हो रहे आलोक नाथ कहते हैं कि वे सोशल मीडिया के इस दौर में प्रशंसकों की चिट्ठियों को मिस करते हैं. यह कहते हुए वे एक बार फिर बाबूजी वाली अपनी छवि हमारे आगे खड़ी कर देते हैं.