केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) ने नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन के ऊपर बनी डॉक्यूमेंटरी ‘द आर्ग्यूमेंटेटिव इंडियन’ में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर आपत्ति जताई है. खबर के मुताबिक बोर्ड ने कहा है कि इस डॉक्यूमेंटरी से ‘गुजरात’, ‘गाय’ और ‘भारत का हिंदुत्व विचार’ शब्दों को हटाने के बाद ही इसे यू/ए सर्टिफिकेट के साथ रिलीज किया जा सकेगा. कोलकाता में डॉक्यूमेंटरी की स्पेशल स्क्रीनिंग के बाद इसके निर्माता सुमन घोष ने यह जानकारी दी है.

सुमन घोष ने मीडिया को बताया है कि डॉक्यूमेंटरी से इन शब्दों को नहीं हटाया जा सकता. इस डॉक्यूमेंटरी को 14 जुलाई को कुछ सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना था और घोष के मुताबिक अब यह मुमकिन नहीं है. इस डॉक्यूमेंटरी में प्रोफेसर सेन, कॉर्नेल विश्वविद्यालय (अमेरिका) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर कौशिक बसु और छात्रों के बीच संवाद दिखाया गया है. बताया जाता है कि यह बातचीत अमर्त्य सेन के बचपन से लेकर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (ब्रिटेन) तक के सफर पर आधारित है.

इस डॉक्यूमेंटरी में अमर्त्य सेन और प्रोफेसर कौशिक बसु के अलावा हार्वर्ड विश्वविद्यालय (अमेरिका) से जुड़ी इतिहासकार सुगाता बोस के साथ बातचीत भी शामिल है. उधर, डॉक्यूमेंटरी पर ताजा विवाद के बाद प्रोफेसर बसु ने इसे देश में ‘अतर्कशील माहौल’ की मौजूदगी का संकेत बताया है.