देश की खुदरा महंगाई दर जून में गिरकर 1.54 फीसदी पर आ गई. यह बीते 18 साल में इसका सबसे निचला स्तर है. मई में यह 2.18 फीसदी थी. खाने-पीने के सामानों के मामले में तो खुदरा महंगाई दर लगातार नकारात्मक जोन में (-2.12 फीसदी) बनी हुई है. हालांकि, दूसरी तरफ चिंता की बात यह है कि इस बीच मई में उद्योगों की विकास दर घटते हुए 1.7 प्रतिशत तक जा पहुंची है.

बुधवार को केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी इन आंकड़ों के बाद भारतीय रिजर्व बैंक पर अगस्त में होने वाली समीक्षा बैठक में ब्याज दरें घटाने का दबाव काफी बढ़ गया है. लंबे समय में महंगाई दर को चार प्रतिशत के आस-पास बनाए रखने के लिए आरबीआई ने अप्रैल 2014 से सख्त मौद्रिक नीति अपना रखी है. इसी चलते उसने अक्टूबर 2016 से बैंकों से कर्ज पर वसूली जाने वाली रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है.

सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार मई में विनिर्माण और खनन गतिविधियों में कमी होने से देश के उद्योगों ने सिर्फ 1.7 फीसदी का विकास किया. अप्रैल में विकास दर 2.8 फीसदी थी. जानकारों के अनुसार रोजगार के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुस्ती आने पर सरकार पर भी अनुकूल फैसले लेने का दबाव बढ़ जाएगा.