केंद्र सरकार ने वित्तीय संकट से जूझ रही सरकारी एयर लाइंस एयर इंडिया को बेचने का फैसला फिलहाल टाल दिया है. सरकार ने इस साल मार्च में एयर इंडिया की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया था. इसके बाद टाटा समूह सहित एयरलाइंस कारोबार से जुड़ी कई कंपनियों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन बाद में विनिवेश से जुड़ी कथित कड़ी शर्तों को देखते हुए ये सभी इस प्रस्ताव से पीछे हट गईं.

अपने ताजा फैसले को लेकर सरकार ने कहा है कि फिलहाल एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति सुधर रही है और वह आगे कंपनी के खर्च में कटौती के लिए कई उपाय करेगी. करीब सालभर पहले भी सरकार ने कुछ ऐसा ही कहा था और एयर इंडिया का खर्च घटाने के लिए कुछ कदम उठाए गए थे. तब इसके तहत घरेलू फ्लाइटों में मांसाहारी भोजन परोसना बंद कर दिया गया था और इसकी मीडिया में खूब चर्चा हुई थी. इसके बाद विस्तारा एयरलाइन द्वारा ट्विटर पर दिया गया एक विज्ञापन भी बड़ी चर्चा में रहा, जिसमें कहा गया था कि अपने लिए वेज या नॉनवेज खाने का चुनाव करना विस्तारा अपने ग्राहकों पर छोड़ती है. बिना कुछ कहे इस नई एयरलाइन कंपनी ने एयर इंडिया के फैसले पर चुटकी ले ली थी.

आज भले ही एयर इंडिया की हालत खराब हो और विस्तारा जैसी कंपनियां तक उसके ऊपर तंज कस देती हों, लेकिन एक जमाना वह भी था जब भारत की यह सरकारी कंपनी अपने शुभंकर की तरह सच में आसमान की ‘महाराजा’ थी. यहां पर एयर इंडिया के कुछ पुराने विज्ञापनों की झलक है जो इसी बात की तस्दीक करते हैं, और साथ ही ये बताते हैं कि एयरलाइंस कंपनियों के विज्ञापन बिना किसी पर तंज किए भी खूब रचनात्मक हो सकते हैं.

एयर इंडिया की स्थापना 1932 में जेआरडी टाटा ने टाटा एयरलाइन के रूप में की थी. 1948 में इसका नामकरण एयर इंडिया इंटरनेशनल कर दिया गया. लेकिन 1953 में​ सरकार ने विमानन क्षेत्र का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला लिया. इससे बाद यह कंपनी सरकार के पास चली गई. नीचे दिया गया पोस्टर 1962-63 का है जो बताता है इस समय तक एयर इंडिया लगातार लोकप्रियता बटोर रही थी.

कहा जाता है कि बाद के दशकों में एयर इंडिया के प्रबंधन पर गैर-पेशेवर रवैया बड़ी तेजी से हावी हुआ और दूसरी तरफ सरकारों ने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. हालांकि शुरुआत में कंपनी अपनी पेशेवर छवि को लेकर कितनी सतर्क थी, यह बात विज्ञापन के लिए बनाए गए एक पोस्टर (नीचे) से समझी जा सकती है. वहीं दूसरा पोस्टर उसकी लोकप्रियता और दुनिया के किसी भी कोने में पहुंच को बताता है.

इन विज्ञापनों में एयर इंडिया दुनियाभर के अलग-अलग शहरों का चक्कर लगाती दिखती है. एयरलाइन का शुभंकर ही नहीं, बल्कि वे शहर और वहां की जगहों के नाम भी बहुत रचनात्मकता के साथ यहां दिखाए गए हैं. इनमें दुनिया के उन दूसरे कोनों की संस्कृति और बाजार की थोड़ी-बहुत झलक भी मिलती है.