कई दिनों के असमंजस के बाद आखिरकार भारतीय क्रिकेट टीम को ऐसे कोच मिल गए हैं जिनकी संगत टीम के जीतने की संभावनाएं काफी बेहतर कर सकती है. बतौर मुख्य कोच रवि शास्त्री कप्तान और खिलाड़ियों से दोस्ताना संबंध रखने वाले माने जाते हैं. वहीं बैटिंग कोच बने राहुल द्रविड़ की खेल को लेकर गंभीरता और ईमानदारी से सभी परिचित हैं. इन दोनों के साथ सीम बॉलिंग के उस्ताद जहीर खान गेंदबाजी कोच की भूमिका में होंगे.

कुल मिलाकर इन तीनों का चयन बिलकुल सही है. लेकिन इस चयन तक पहुंचने की प्रक्रिया एक बार फिर बताती है कि बीसीसीआई में प्रशासन के स्तर पर भारी गड़बड़ी और हड़बड़ी है. वैसे राहुल द्रविड़ और जहीर खान का चयन मास्टर स्ट्रोक कहा जा सकता है क्योंकि इनके रहते खिलाड़ियों की निजी महत्वाकांक्षाएं और अहम के टकराव से बची रहेगी, वहीं ये दोनों टीम के हर एक सदस्य को 2019 का विश्व कप जीतने के साझे लक्ष्य की तरफ प्रेरित कर सकते हैं.

चूंकि कप्तान विराट कोहली और बाकी खिलाड़ियों के रवि शास्त्री से दोस्ताना संबंध हैं इसलिए आशंका व्यक्त की जाती है कि कहीं इससे टीम का अनुशासन न बिगड़ने लगे या उसमें गैरजरूरी दुस्साहस न आ जाए. राहुल द्रविड़ की उपस्थिति इस आशंका को काफी हद तक दूर कर देती है. उन्हें हर स्तर के खिलाड़ी पसंद करते हैं और इनके बीच राहुल का खासा सम्मान भी है. वहीं इंडिया-ए और अंडर-19 टीम का कोच रहते हुए उन्होंने काफी प्रतिष्ठा भी कमाई है. यानी उनकी उपस्थिति में बाकी खिलाड़ी के लिए उनसे कुछ न कुछ सीखने की गुंजाइश बनी ही रहेगी.

कुछ ऐसी बातें ही जहीर खान के बारे में भी कही जा सकती हैं. उन्होंने अपने करियर के बीच में खुद को नए सिरे से ढालकर और नया गेंदबाज बनकर बल्लेबाजों को चौंकाया था. वे अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में शुमार थे. जहां तक मार्गदर्शक की भूमिका की बात है तो आईपीएल में डेल्ही डेयरडेविल्स के कप्तान के रूप में उन्हें खूब तारीफ मिलती रही है. इस टीम में शामिल रहे ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज पैट कमिन्स तो उनसे इतने प्रभावित थे कि उन्होंने एक बार कहा था कि वे जहीर को अपने साथ ऑस्ट्रेलिया ले जाना चाहते हैं. जाहिर है कि भारतीय टीम के इस पूर्व तेज गेंदबाज की संगत नई पीढ़ी के भारतीय गेंदबाजों के लिए बेहद कीमती साबित होने जा रही है.

अब इस बात की चर्चा भी जरूरी है कि कैसे कोच के चयन की यह प्रक्रिया इसमें शामिल ज्यादातर लोगों या पक्षकारों के लिए खुशनुमा नहीं रही. चाहे बीसीसीआई हो, क्रिकेट सलाहकार समिति के सदस्य- सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण हों या फिर कप्तान विराट कोहली, इस दौरान इन सभी की छवि पर बुरा असर पड़ा है. विराट को लंबे समय तक इन आरोपों का सामना करना पड़ सकता है कि वे अड़ियल हैं और अपनी मर्जी थोपते हैं.

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक अच्छी बात यह होने जा रही है कि भारतीय टीम जल्दी ही श्रीलंका दौरे पर रवाना होगी. यह दौरा उम्मीद बंधाता है कि भारतीय क्रिकेट अनिल कुंबले प्रकरण को जल्द ही पीछे छोड़कर एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ जाएगी. (स्रोत)