राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर लगे भ्रष्टाचार के आराेपों में सीबीआई जांच शुरू होने के बाद बिहार के सत्ताधारी महागठबंधन का भविष्य संकट में है. इसे देखते हुए गठबंधन की साझीदार कांग्रेस ने हालात संभालने की कोशिशें शुरू की हैं. हालांकि द एशियन एज की ख़बर में ही ऐसे संकेत भी छिपे हैं जिनसे कांग्रेस के प्रयासों की सफलता पर संशय भी पैदा होता है.

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ख़ुद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात की है. सोनिया ने यूं तो नीतीश को धन्यवाद देने के लिए फोन किया था कि उन्होंने विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बनाए गए गोपालकृष्ण गांधी को समर्थन देने पर सहमति दी. लेकिन इस बातचीत में राजद और जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) के बीच फंसे पेंच पर भी बात हुई. यही नहीं इसी सिलसिले में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी नीतीश से मिलने वाले हैं. उनकी यह मुलाकात 22 या 23 जुलाई को हो सकती है.

वैसे कांग्रेस के सूत्र मानते हैं, ‘बिहार में महागठबंधन को कोई ख़तरा नहीं है. लालू के पुत्र और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोपों के सिलसिले में नीतीश ने जो सख़्त रुख़ अपनाया है वह सिर्फ अपनी छवि को बनाए रखने के लिए है.’ हालांकि कांग्रेस के इसी तर्क में जद-यू के प्रवक्ता केसी त्यागी मार्के की बात जोड़ते हैं. उनके मुताबिक, ‘यह नीतीश की छवि ही है जिसकी वज़ह से उन्हें कुर्सी (मुख्यमंत्री की) मिली है. ऐसे में हम उनकी छवि को धक्का पहुंचने की नौबत नहीं आने दे सकते.’ यानी यहीं से यह संकेत पकड़े जा सकते हैं कि महागठबंधन और छवि बचाने की साथ-साथ चल रही मुहिमों में किसके बचने की संभावना ज़्यादा है.