मरने के बाद भी राजस्थान का कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है. बुधवार को नागौर में उसकी मौत की सीबीआई जांच को लेकर जुटी एक विशाल भीड़ की पुलिस से झड़प हो गई जिसमें एक शख्स की मौत हो गई और 28 लोग घायल हो गए. इसके बाद भारी तनाव को देखते हुए इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है. नागौर समेत आसपास के जिलों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गयी हैं.

करीब डेढ़ साल की फरारी के बाद आनंदपाल पिछले महीने पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था. इस मुठभेड़ की सीबीआई जांच करवाने पर अड़े उसके परिजनों ने 19 दिन के बाद भी उसके शव का अंतिम संस्कार नहीं किया और बुधवार को नागौर जिले में स्थित उसके पैतृक गांव सांवराद में एक श्रद्धांजलि सभा बुलाई. इसमें राजस्थान समेत आसपास के राज्यों से राजपूत समुदाय के 50 हजार से भी ज्यादा लोग इकट्ठा हो गए. इसी दौरान भीड़ ने उग्र रूप धारण कर लिया और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की झड़प हो गयी. इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि 21 पुलिसकर्मियों सहित 28 लोग घायल हो गए. दो पुलिसकर्मियों की हालत गंभीर बताई जा रही है.

जानकारी के मुताबिक उपद्रवियों ने नागौर के एसपी पारस देशमुख की कार को आग के हवाले कर दिया. हालांकि देशमुख को कार से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन इस दौरान भीड़ ने उनके गनमैन को गंभीर रूप से घायल कर दिया. इसके अलावा उपद्रवियों द्वारा रेल की पटरियां उखाड़ने और सड़कमार्ग भी बाधित करने की खबरें मिली हैं. लोगों का आरोप है कि पुलिस ने सभा में भाग लेने आए लोगों पर गोलियां चलाई थीं जिससे प्रदर्शन हिंसक हो गया. जबकि प्रशासन का कहना है कि पहले गोली उपद्रवियों की तरफ से चलाई गयी और उसके बाद मजबूरन पुलिस को रबर की गोलियों, आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा. खबरों के मुताबिक भीड़ ने जवानों से एक एके-47 और दो राइफलें भी छीन लीं.

बताया जा रहा है कि बुधवार को प्रशासन काफी हद तक आनंदपाल के परिवार को उसके अंतिम संस्कार के लिए मनाने में सफल हो गया था. लेकिन शाम को यह हंगामा हो गया. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से बात कर हालात की जानकारी ली है. वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रदेश सरकार पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है. 24 जून को हुए आनंदपाल के एनकाउंटर को उसके परिजनों और राजपूत समाज के लोगों ने सरकारी हत्या करार दिया है. राजपूत संगठन करणी सेना का आरोप है कि आनंदपाल समर्पण करने के लिए तैयार था, लेकिन इससे मौजूदा सरकार के कई मंत्रियों के कच्चे चिठ्ठे सामने आने का खतरा था लिहाजा सरकार ने उसे मरवा दिया.