जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी संगठनों द्वारा गुरुवार को ‘शहीदी दिवस’ के मौके पर बुलाई गई हड़ताल के बाद प्रशासन ने शोपियां में कर्फ्यू लगा दिया है. इसके साथ ही श्रीनगर, अनंतनाग, पुलवामा और कुलगाम में भी लोगों की सामूहिक गतिविधियों पर पाबंदी लगाई गई है. खबर के मुताबिक अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक को उनके आवास पर नजरबंद रखा गया है.

कश्मीर में महाराज हरि सिंह के शासनकाल के दौरान 13 जुलाई, 1931 को शाही सेना की गोलीबारी में 21 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी. कुछ लोग इसे राजशाही के खिलाफ लोकतांत्रिक प्रदर्शन बताते हैं तो कुछ के मुताबिक यह इस्लामिक कट्टरपंथियों का विद्रोह था. हालांकि इस विवाद के बावजूद कश्मीर में एक बड़ा तबका आज के दिन को ‘शहीदी दिवस’ के तौर पर मनाता है.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है. उधर, अलगाववादियों की हड़ताल और प्रशासन की सख्ती के चलते घाटी में पेट्रोल पम्प सहित अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे. साथ ही बीएसएनएल की ब्रॉडबैंड सेवा छोड़कर अन्य मोबाइल इंटरनेट सेवाएं काम नहीं कर रही हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम में 1931 के ‘शहीद’ प्रदर्शनकारियों को याद किया है. इस मौके पर उन्होंने आम नागरिकों से डर और अशांति फैलाने वाले लोगों के खिलाफ संघर्ष करने की अपील की है. दूसरी ओर, सरकार में साझेदार भाजपा ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाते हुए हर बार 13 जुलाई की तरह आज भी ‘काला दिवस’ मनाया है.