शराब कारोबारी विजय माल्या को अगर भारत ले जाने की इजाज़त दी गई तो उन्हें उच्च सुरक्षा और सुविधाओं से लैस मुंबई की आर्थर रोड जेल की 12 नंबर बैरक में रखा जाएगा. द हिंदू के मुताबिक माल्या के प्रत्यर्पण के मामले में भारतीय पक्ष ने ब्रिटिश अभियाेजन सेवा (यूके क्राउन प्रॉसीक्यूशन सर्विस- यूके सीपीएस) को यह भरोसा दिलाया है. यह आश्वासन माल्या की उस दलील के मद्देनज़र दिया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय जेलों की हालत बेहद ख़राब है. इसे ध्यान में रखते हुए उनके प्रत्यर्पण को मंज़ूरी न दी जाए.

अख़बार के मुताबिक माल्या की दलील के बाद यूके सीपीएस ने भारत से कुछ सवाल किए थे. इनमें पूछा था कि अगर माल्या प्रत्यर्पित करने की भारत की अपील को मंज़ूर किया गया तो उन्हें किस जेल में रखा जाएगा? उन्हें जिस बैरक रखा जाएगा क्या उसमें कम से कम तीन वर्ग मीटर की जगह होगी? क्या उन्हें साफ दरी-चादर वग़ैरह उपलब्ध कराए जाएंगे? वहां पीने के साफ पानी का समुचित बंदोबस्त होगा या नहीं? भारत ने यूके सीपीएस को इन्हीं तमाम सवालों का जवाब भेजा है.

अख़बार के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से माल्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जो स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई है उसमें यूके सीपीएस को भेजे ज़वाब की प्रति भी संलग्न है. इसमें भारत की ओर से यूके सीपीएस को यह भी बताया है कि लेखक ‘ग्रेगरी डेविड रॉबर्ट के उपन्यास ‘शांताराम’ में मुंबई की आर्थर रोड जेल की जो स्थिति बताई गई है वह पूरी तरह काल्पनिक है. इस उपन्यास में जिन घटनाओं का हवाला दिया गया है कि वे बीते 40 साल में इस जेल में कभी नहीं हुई हैं.’

ग़ौरतलब है कि माल्या पर भारतीय बैंकों का करीब 9,000 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है. इसे चुकाए बगैर ही वे लंदन भाग गए हैं. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार वहां से उनका प्रत्यर्पण कराकर भारत लाने की कोशिश कर रही है. माल्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी मुकदमा चल रहा है. इसकी 14 जुलाई को सुनवाई है. इसमें केंद्र द्वारा पेश स्टेटस रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा.