सुप्रीम कोर्ट ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को भारत में मतदान करने का अधिकार देने के बारे में फैसला करने के लिए केंद्र सरकार को एक हफ्ते का समय दिया है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा है कि वह एनआरआई को पोस्टल बैलेट से मतदान का अधिकार देने के लिए जनप्रतिनिधित्व कानून या नियमों में संशोधन करेगी या नहीं. शुक्रवार को एनआरआई लोगों को मताधिकार देने की मांग करने वाली याचिकाओं की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने केंद्र से अगले शुक्रवार तक जवाब देने का निर्देश दिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र और चुनाव आयोग दोनों ही एनआरआई को मताधिकार देने पर सहमत हैं, लेकिन इसको लागू करने के तरीके को लेकर असहमति है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट को बता चुका है कि वह इस मसले पर कानून बनने के तीन महीने के भीतर एनआरआई को मताधिकार देने की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए तैयार है.

अगर केंद्र सरकार पोस्टल बैलेट के जरिए एनआरआई को मताधिकार देने के लिए तैयार हो जाती है तो इससे एक करोड़ से ज्यादा अनिवासी भारतीयों को चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा. इसमें केरल, पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्यों की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी होगी, क्योंकि एनआरआई सबसे ज्यादा इन्हीं राज्यों से हैं.