लालू जी, आपके ऊपर आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए आपने रेलवे के होटलों के रखरखाव के ठेके गलत तरह से निजी कंपनियों को दिए और इसके बदले में आपके परिवार वालों को सस्ती कीमत पर मौके की जमीनें मिल गईं. इन आरोपों में कितनी सच्चाई है?

जितनी मेरे चारा खाने में... अब्ब्ब...मतलब जैसे मेरे ऊपर चारा घोटाले का आरोप झूठा है, वैसे ही यह सिर्फ एक षड्यंत्र है और कुछ नहीं...मोदी जी महागठबंधन से इतने डर गए हैं कि इसे तोड़ने के लिए ‘सास, बहू और साजिश’ टाइप के काम करवाने लगे हैं.

यानी महागठबंधन टूटता है तो आपके मुताबिक इसके लिए नीतीश कुमार के बजाय नरेंद्र मोदी जिम्मेदार होंगे?

अरे ऐसे कैसे टूट जाएगा, हमहीं न चिपकाये हैं...सुशासन बाबू, अब्ब्ब...मेरा मतलब नीतीश जी को अभी मोदी जी के ‘अच्छे दिनों’ की हकीकत ठीक से समझ नहीं आई है. मोदी राज में जब आडवाणी जी तक के अच्छे दिन नहीं आ सके, तो उनके कैसे आ जाएंगे भला!

लेकिन इस समय राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष का महागठबंधन टूटने के कगार पर है. इसे बचाने के लिए आप क्या करेंगे?

यहां महापरिवार टूटने के कगार पर है और आपको महागठबंधन की पड़ी है! हमारे देश में परिवार को बचाना राजनीतिक गठबंधन बचाने से कहीं बड़ी चुनौती है. आजकल तीन लोगों वाले परिवार भी एक छत के नीचे नहीं रह रहे हैं, हमें 11 लोगों के परिवार को बचाना है. पहले जरा महापरिवार संभालने दीजिए, महागठबंधन अपने आप संभल जाएगा.

प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी और सीबीआई की आपके खिलाफ जांच पर नीतीश कुमार की चुप्पी को आप किस तरह से देखते हैं?

अभी तो वे मुहवा में दहीये जमाए हैं...जब ई दही से सारा दूध फट जाएगा, तब नीतीश कुमार बहुत पछताएंगे!

ऐसा लग रहा है कि नीतीश जी अपनी साफ-सुथरी छवि को बचाने के लिए आपसे मुक्ति पाना चाह रहे हैं. इस पर क्या कहेंगे?

नीतीश जी अभी तक यही नहीं समझ पाए हैं कि फर्नीचर में जो काम फेवीकॉल करता है, राजनीति में वही काम भ्रष्टचार करता है! एक यही तो है, जो सारी पार्टियों को बिना शर्त जोड़े रखता है...अब्ब्ब...मेरा मतलब कि भ्रष्टाचार की लड़ाई में नीतीश जी भले हमारा साथ न दें, लेकिन हम उनके साथ तो हइये हैं. जो लोग जांच-वांच की गीदड़-भभकी से डराने की गलती कर रहा है, हम उनको मिलकर जवाब देंगे.

लालू जी, सीबीआई के साथ-साथ ईडी भी मनी लॉन्डरिंग के मामले में आपकी जांच कर रहा है. क्या इससे आपके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के दाग और गहरे नहीं हो गये हैं?

लगता है कि आप ऊ बात नहीं सुनी हैं, ‘दाग अच्छे हैं!’ लेकिन ई लाइन सर्फ एक्सल के लिए नहीं, भारत के नेताओं के लिए भी होनी चाहिए थी (हंसते हुए).

लेकिन भ्रष्टाचार के इसी दाग की वजह से आपको सक्रिय राजनीति से बाहर होना पड़ा है.

जब तक रहेगा समोसे में आलू, तब तक रहेगा राजनीति में लालू, समझी कि नहीं!...लालू के बिना इस देश में राजनीति ही निष्क्रिय हो जाएगी! ट्वीटर पर एक करोड़ फॉलोअर है हमारा, इतना तो देश के गृहमंत्री का भी नहीं है भाई...और आप कहती हैं कि हम सक्रिय राजनीति से बाहर हो गये हैं (हंसते हुए)!

अच्छा, यह बताइये कि इतने फ्लैट्स और जमीन का आखिर आप करेंगे क्या?

जमीन पर अपनी गाय-भैंसों के लिए चारा उगाएंगे और क्या करेंगे! रही बात फ्लैट्स की, त,ई सब नेता लोग अपना दू गो बच्चा के लिए पांच-छह गो फलेट्स का इंतजाम करता है... हम क्या अपने नौ बच्चा को अइसे ही छोड़ देंगे का! ...हमको अपना नौ बच्चा उतना ही प्यारा है, जितना उन्हें अपना दुगो-तीनगो है. अभी तो बीवी बच्चा मिला के, प्रति व्यक्ति दू गो फ्लैट भी नहीं आ रहा है हिस्से में...और आप बात करती हैं...(खीजते हुए)

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने तो सीधे-सीधे आरोप लगाया है कि रेल मंत्री रहते हुए आपने नौकरी दिलवाने के बदले 18 फ्लैट अपने नाम करा लिए. इसमें कितनी सच्चाई है?

असल में वे दुखी हैं कि उनके बाल राजनीति के बजाय धूप में सफेद हो गए, और वे आज तक ऐसी कोई जादुई कला नहीं सीख सके कि बिना सीमेंट और ईंटा लगाए कैसे पूरी बिल्डिंग खड़ी की जाती है!...ये सब आरोप झूठा है, बेबुनियाद है.

आपके बड़े बेटे ने भी धोखाधड़ी से पटना में पेट्रोल पंप हासिल किया था. क्या यह शर्मनाक नहीं है कि इतनी छोटी उम्र से ही आपके बेटे-बेटियों के नाम भ्रष्टाचार से जुड़ गए हैं और सीबीआई उनकी जांच कर रही है?

(हंसते हुए) बुड़बक हैं आप लोग, सीबीआई की जांच तो सम्मान की बात है, अब्ब्ब...मेरा मतलब जो सीबीआई खुद ही भ्रष्ट हो चुकी है, वह दूसरे भ्रष्टों...मेरा मतलब हमारी जांच क्या करेगी! शर्मनाक तो सीबीआई अधिकारियों के लिए है कि सरकार बदलते ही उनकी जांच, परिणाम और टारगेट बदल जाते हैं.

मीसा भारती पर भी करोड़ो रुपयों के काले धन को सफेद करने का आरोप लगा है, इसके बारे में आपका क्या कहना है?

देखिये, मीसा उन गिनी-चुनी होनहार बेटियों में से है, जो हर मामले में बाप और भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिला के चल रही हैं. बाकी ज्यादातर नेताओं के सिर्फ बेटे ही बाप का नाम रौशन करते हैं. जबकि मेरे सिर्फ बेटों पर ही नहीं, बल्कि बेटियों पर भी भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लग रहे हैं. असल में, मैंने अपने बेटे-बेटियों में कोई भेदभाव नहीं किया. दुनिया अपने बच्चों को सिर्फ पैतृक संपत्ति देती है. मैंने उन्हें संपत्ति से बढ़कर एक हुनर बराबर दिया है.

कैसा हुनर?

भ्रष्टाचार का हुनर! अब्ब्ब...मेरा मतलब कि मैंने अपने सभी बेटे-बेटियों को भ्रष्टाचार के झूठे आरोपों से हिम्मत से लड़ने का तरीका सिखाया है. मीसा पर लगे सारे आरोप बेबुनियाद है, वह हिम्मत से उनका सामना कर रही है. मुझे पूरी उम्मीद है कि वह अपनी करोड़ों की बेनामी संपत्ति बचाने में...अब्ब्ब...मेरा मतलब कि झूठे आरोपों से बचने में सफल होगी.

अच्छा यह बताइये, भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद क्या आपके बेटे को नैतिक रूप से उपमुख्यमंत्री का पद नहीं छोड़ देना चाहिए?

(थोड़ा सोचते होते हुए) वो कुर्सी छोड़ेगा तो फिर किसे बैठाऊंगा, अभी तो सारा परिवार ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा है! देखिये राजनीति में नैतिकता-अनैतिकता कुछ होता-ओता नहीं है, यहां सिर्फ एक ही संस्कार चलता है और वो है भ्रष्टाचार, अब्ब्ब...मेरा मतलब कि राजनीति में भ्रष्टाचार के आरोप झेलने का मतलब है कि आप इस क्षेत्र के लिए परिपक्व हो रहे हैं. मुझे खुशी है कि यह पद मेरे बेटे को परिपक्व बना रहा है, उसे डटे रहना चाहिए!

लेकिन नीतीश जी तो तेजस्वी से इस्तीफा मांग रहे हैं. इस पर आप क्या कहेंगे?

प्रधानमंत्री पद की अपनी दावेदारी छोड़ के, तेजस्वी के उप-प्रधानमंत्री पद पर तो पहले ही बिजली गिरा चुके हैं वे, अब क्या बचुआ की जान लेंगे!