भारत 2019 में जी-20 सम्मेलन की मेज़बानी नहीं कर सकेगा. द हिंदू बिजनेस लाइन की एक खबर मुताबिक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इससे पीछे हटने का फैसला किया है. अख़बार के मुताबिक 2019 में लोक सभा चुनाव के मद्देनज़र मोदी सरकार जी-20 सम्मेलन की मेज़बानी से पीछे हटी है. इस फैसले से जुड़े एक सूत्र का कहना है, ‘इस बाबत राजनीतिक स्तर पर फैसला किया गया है. अब हम देखते हैं कि अगली बार कब भारत इस सम्मेलन की मेज़बानी के लिए दावा कर सकता है.’

वैसे सूत्र यह भी बताते हैं कि भारत ने 2018 में जी-20 सम्मेलन की मेज़बानी हासिल करने की कोशिश की थी. उसकी ओर से इस सिलसिले में संगठन के सदस्याें से बातचीत भी शुरू की गई थी. लेकिन अर्जेंटीना अपनी दावेदारी छोड़ने को राज़ी नहीं हुआ. इसलिए उसे ही 2018 में होने वाले सम्मेलन की मेज़बानी सौंप दी गई.

जी-20 सम्मेलन का आयोजन सदस्य देशों के बीच बारी-बारी से होता है. इसके लिए सभी सदस्य देशों को पांच समूहों में बांटा गया है. हर समूह में चार सदस्य हैं. एक समूह का कोई सदस्य देश जब सम्मेलन की मेज़बानी का चुका होता है तो उसके बाद दूसरे समूह का अन्य सदस्य देश उसके लिए दावेदारी कर सकता है. जैसे कि पांचवें समूह के सदस्य देश चीन ने 2016 में सम्मेलन की मेज़बानी की थी. उसके बाद चौथे समूह के सदस्य देश जर्मनी ने 2017 में. इस संगठन के दूसरे समूह में भारत को रूस, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की के साथ रखा गया है. उसे 2019 में इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन की मेज़बानी करनी थी.