जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने चीन के कब्जे से अपने क्षेत्रों को वापस लेने के मामले में भारत को कमजोर बताया है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार चीन के साथ सीमा विवाद में उलझने से बचने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, ‘लद्दाख में चीन ने अक्साई चिन पर कब्जा कर लिया. हम इसको लेकर बहुत चिल्लाए, लेकिन हमारे पास इसे वापस लेने की ताकत नहीं है.’ फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा कि चीन की मंशा काराकोरम दर्रे को रेशम मार्ग (सिल्क रूट) के लिए इस्तेमाल करना और उसे बंदरगाह से जोड़ना है जो निश्चित तौर पर चीन के कब्जे वाले भारतीय हिस्से से गुजरेगा.

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान और चीन के संबंधों को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘चीन पाकिस्तान का दोस्त है. अगर हमने उससे (चीन) दोस्ती निभाई होती तो वह पाकिस्तान का दोस्त नहीं होता.’ उन्होंने कश्मीर मामले में चीन की दखलअंदाजी की जानकारी से इनकार किया. बीते हफ्ते शनिवार को जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर में चीन की दखलअंदाजी की बात कही थी.

वही, तिब्बती धर्म गुरू दलाई लामा को लेकर चीन की आपत्ति पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने कहा, ‘दलाई लामा दूसरी तरह का मामला है. वे (चीन) कह रहे हैं कि दलाई लामा को देश से निकाल दिया जाए. भारत जानता है कि किसी एक को जगह देने के लिए दूसरे को बाहर नहीं निकाला जा सकता.’ सिक्किम सेक्टर में पिछले महीने भारत द्वारा चीन के सड़क निर्माण का विरोध करने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है.