उत्तर कोरिया के साथ बातचीत के हिमायती दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति मून जो-इन ने इस दिशा में औपचारिक कदम बढ़ा दिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के सामने सैन्य वार्ता का प्रस्ताव रखा है. इसका मकसद अत्यधिक सैन्यीकृत सीमा के नजदीक तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों को रोकने के तौर-तरीकों पर विचार करना है.

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया से संबंधों के लिए जिम्मेदार दक्षिण कोरिया के मंत्री चो मियांग जिऑन ने कहा, ‘कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति बहाली दोनों देशों के बीच तनाव घटाने में मददगार होगी. उत्तर कोरिया की परमाणु समस्या से निपटने में बातचीत और आपसी साझेदारी ही काम आएगी.’ दक्षिण कोरिया ने इसके लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है. हालांकि, उत्तर कोरिया ने इसका तत्काल कोई जवाब नहीं दिया है. अगर उत्तर कोरिया इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है तो दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जो-इन के कार्यकाल की यह पहली वार्ता होगी. धुर विरोधी इन देशों के बीच आखिरी बातचीत दिसंबर 2015 में हुई थी.

हालांकि, उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन ने मई 2016 में अपने एक भाषण में वार्ता के लिए प्रस्ताव रखा था. लेकिन, दक्षिण कोरिया की तत्कालीन राष्ट्रपति पार्क ग्वेन-हे ने इसे खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा था कि इसके लिए उत्तर कोरिया को पहले अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को बंद करने की शुरुआत करनी होगी. इस बीच सोमवार को ही दक्षिण कोरिया के उप रक्षा मंत्री सुह चाओ-सुक ने उत्तर कोरिया से मिलिट्री हॉटलाइन सेवा को दोबारा शुरू करने की अपील की है जो पिछले साल उसके परमाणु परीक्षण के बाद से बंद है.

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के सामने सैन्य वार्ता का प्रस्ताव ऐसे समय में रखा है, जब उसके कथित अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) के परीक्षण के चलते उसका अमेरिका और अन्य देशों के साथ तनाव बढ़ा हुआ है. इस परीक्षण के बाद उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि यह अमेरिका तक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है.