फंसे हुए कर्ज (एनपीए) पर नया अध्यादेश लाने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मार्च 2019 तक आठ लाख करोड़ रुपये का एनपीए वसूलने के लिए सख्त कदम उठा सकता है. इसके तहत आरबीआई पूरे एनपीए को दिवालिया और शोधन अक्षमता संहिता के तहत ला सकता है. एसोसिएटेड चैंबर्स आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) ने एनपीए पर जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही है.

एसोचैम के इस अध्ययन में कहा गया है कि बैंकिंग नियमन (संशोधन) अध्यादेश में एनपीए के उच्च स्तर से जूझने और बैंकों की वित्तीय सेहत सुधारने की ताकत है. संस्था के महासचिव डीएस रावत का मानना है कि मई में लाया गया यह अध्यादेश इस समस्या के लिए जरूरी कड़वी दवा जैसा है. रिपोर्ट में उम्मीद जाहिर की गई है कि एनपीए की समस्या वर्ष 2018-19 के मार्च तक बहुत हद तक सुलझ जाएगी. उसने सुधरते आर्थिक चक्र के साथ सरकार और रिजर्व बैंक के कई मजबूत कदमों को इस दिशा में लाभकारी बताया है.

इस अध्यादेश के जरिए आरबीआई को विस्तृत विधायी शक्तियां मिल गई हैं. वह कर्ज की वसूली के लिए बैंकों को निर्देश जारी कर सकता है. इसके अलावा वह कर्जदारों से कर्ज वसूली के लिए इन्सॉल्वेंसी और दिवालिया संहिता, 2016 के तहत दिवालिया प्रक्रिया शुरू कर सकता है. यह कानून आरबीआई को एक निरीक्षण पैनल बनाने का भी अधिकार देता है जो डूबे कर्जों के निबटान के लिए सामूहिक और व्यवस्थित फैसले लेगा. इससे जांच होने की सूरत में बैंक के शीर्ष अधिकारियों में जांच एजेंसियों का डर बहुत कम हो गया है. पहले जांच एजेंसियों के डर से ही ज्यादातर बैंक डूबे कर्जों को एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनियों को बेचने से कतराते थे. ये वे कंपनियां होती हैं जो येन-केन-प्रकारेण फंसे कर्ज को वसूलने का काम करती हैं.