गुजरात उच्च न्यायालय ने एस्सार स्टील की भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है. मार्च 2019 तक फंसा हुआ कर्ज (एनपीए) वसूलने की कोशिश में जुटे बैंकों के लिए इस फैसले को काफी राहत देने वाला माना जा रहा है. अभी देश के सभी बैंकों का विभिन्न कंपनियों पर करीब आठ लाख करोड़ का बकाया है. इससे बैंकिंग सेक्टर की हालत बहुत खराब हो गई है.

इससे पहले 14 जुलाई को उच्च न्यायालय ने एस्सार स्टील की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. याचिका दायर करने के बाद कोर्ट ने कंपनी के खिलाफ नई शोधन अक्षमता (इन्सॉल्वेंसी) संहिता के तहत कार्रवाई रोकने का आदेश जारी किया था. कंपनी ने हाई कोर्ट में आरबीआई के उस सर्कुलर के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें उसने बैंकों को एस्सार और अन्य 11 बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है. इन 12 कंपनियों में से प्रत्येक पर कम से कम 5,000 करोड़ रुपये की राशि बकाया है.

इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार एस्सार स्टील की दलील थी कि वह अभी कर्ज के पुनर्गठन में जुटी है और ऐसे में शोधन अक्षमता और दिवालिया संहिता के तहत कार्रवाई का आरबीआई का सर्कुलर सही नहीं है. एस्सार स्टील ने कहा था कि उसके साथ कार्रवाई का सामना करने जा रही अन्य 11 कंपनियों के जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसका प्रदर्शन काफी अच्छा है. फिलहाल एस्सार स्टील का टर्नओवर 20 हजार करोड़ रुपये सालाना है.

आरबीआई को डूबे कर्ज की वसूली के लिए शोधन अक्षमता और दिवालिया संहिता के तहत कार्रवाई का अधिकार दे देने के बाद वसूली प्रक्रिया में काफी तेजी आई है. देश के केंद्रीय बैंक ने एक सर्कुलर जारी कर बैंकों को 12 बड़ी डिफॉल्टर कंपनियों के खिलाफ तत्काल इस संहिता के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया है. उसने पिछले महीने ही 12 ऐसे शीर्ष खातों की सूची जारी की थी. अकेले इन खातों पर ही करीब 1.75 लाख करोड़ का बकाया है जो कुल एनपीए का लगभग एक चौथाई है. एस्सार स्टील के अलावा बाकी 11 कंपनियों में भूषण स्टील, लैंको, वीडियोकॉन, जेपी ग्रुप, एस्सार, एबीजी शिपयार्ड, पुंज लॉयड, इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स, अबान होल्डिंग्स, मोनेट इस्पात, प्रयागराज पावर और इरा ग्रुप शामिल हैं.