चीन ने इसी सोमवार को ख़ुलासा किया है कि उसने तिब्बत के पठार पर अपनी सैन्य क्षमताओं को परखा है. उसकी ओर से इस सैन्य अभ्यास के सीसीटीवी फुटेज भी ज़ारी किए गए. इसके बाद ख़बर आई है कि चीन का सैन्य अभ्यास कोई नियमित कार्रवाई नहीं बल्कि भारत को संदेश देने के लिए था कि वह सिक्किम में डोकलाम (डोका ला) पठार पर बना गतिरोध तोड़ने के लिए बल प्रयोग भी कर सकता है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक चीन ने दुनिया बड़े देशों को भी उनके राजदूतों के ज़रिए यह संदेश भिजवा दिया है.

अख़बार ने उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बताया है कि पिछले हफ्ते ही राजधानी बीजिंग में चीन के अधिकारियों ने विदेशी राजदूतों के साथ बंद कमरे में बैठकें की हैं. इनमें जी-20 और पी-5 (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य) देशों के राजदूत ख़ास तौर पर बुलाए गए थे. उन्हें चीनी अधिकारियों ने बताया है कि अब तक डोकलाम में चीन की सेना ने पूरा धैर्य और संयम बरता है. इस इंतज़ार में कि भारत के साथ गतिरोध शांतिपूर्ण तरीके से हल हो जाएगा. लेकिन यह इंतज़ार अनिश्चितकाल के लिए नहीं हो सकता.

पी-5 देशाें में से ही एक के राजनयिक ने अख़बार से बातचीत में इस बैठक की पुष्टि करते हुए कहा, ‘हमारे सहयोगी ख़ुद उस बैठक में मौज़ूद थे. उन्हें चीनी पक्ष ने बताया है कि भारत ने चीन के अधिकार क्षेत्र में दख़लंदाज़ी की है. यथास्थिति को बदलने की कोशिश की है. चीन ने यह भी कहा है कि वह अनंत काल तक गतिरोध टूटने की प्रतीक्षा नहीं करेगा. यह हमारे लिए चिंताज़नक है. हमने इस बाबत बीजिंग में पदस्थ भारतीय राजनयिक सहयोगियों और दिल्ली में मौज़ूद भूटानी राजनयिकों को सूचित कर दिया है.’

ग़ौरतलब है कि सिक्किम से लगा डोकलाम पठार वैसे तो भूटान के अधिकार क्षेत्र में है लेकिन चीन इसे अपना मानता है. उसके मुताबिक इसका नाम डोंगलोंग है. अपने इसी दावे को और मज़बूत करने के लिए वह यहां सड़क निर्माण करना चाहता है. लेकिन भूटान के आग्रह पर भारतीय सेना ने यहां चीन को सड़क बनाने से रोक रखा है. यही इस पूरे विवाद का कारण है. वैसे भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 26-27 जुलाई को चीन जा रहे हैं. उम्मीद है कि उनकी यात्रा के दौरान इस विवाद के हल की दिशा में बात आगे बढ़ेगी.