कछुए और खरगोश की दौड़ की कहानी पुरानी है. इसमें कछुए को काफी पीछे छूटा देख खरगोश बीच रास्ते में थोड़ा आराम करने की सोचता है. उसे नींद आ जाती है और कछुआ जीत जाता है. इस कहानी में एक बात यह भी समझ में आती है (जो कभी बताई नहीं गई) कि कछुआ तब ही जीत सकता है जब खरगोश सो जाए यानी रेस जीतने के लिए कछुए को हमेशा खरगोश के सोने की दुआ करनी पड़ेगी. महिला विश्वकप के दूसरे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के सामने आज भारतीय टीम का हाल भी कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है. उसे अपने खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों से बुरे प्रदर्शन की उम्मीद करनी पड़ेगी.

यह बात यूं ही नहीं कही जा रही, आंकड़ों और ऑस्ट्रेलिया के प्रदर्शन को देखने के बाद हर कोई यह बात कहने को मजबूर हो सकता है. 1973 में पहला महिला क्रिकेट विश्वकप खेला गया था तब से लेकर 10 विश्वकप खेले जा चुके हैं. इनमें से आठ बार ऑस्ट्रेलिया फाइनल में पहुंचा जिसमें उसने छह बार जीत भी हासिल की. ऑस्ट्रेलिया से अलग भारत केवल एक बार ही इस आयोजन के फाइनल में पहुंचा है. 2005 में हुए इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने ही उसे बड़े अंतर से हराया था.

लेकिन यह सिर्फ विश्व कप की बात नहीं है. अब तक महिला वनडे क्रिकेट में भारत 42 बार ऑस्ट्रेलिया से भिड़ चुका है जिसमें उसे केवल आठ बार ही सफलता मिली है. ऑस्ट्रेलियाई टीम और भारतीय टीम में कितना बड़ा अंतर है इसका पता इस बात से चलता है कि ऑस्ट्रेलिया की नौंवें नंबर की बल्लेबाज भी टेस्ट में शतक लगा चुकी है. जबकि, भारत किसी टेस्ट मैच में यही कोशिश करता है कि उसके नौवें नंबर के खिलाड़ी की खेलने की स्थिति न आए.

ऑस्ट्रेलियाई टीम ने अपने हर खिलाड़ी को इतना परिपक्व बना रखा है कि इस विश्वकप के पिछले दो मैचों में चोटिल होने की वजह से उसकी सबसे बेहतर बल्लेबाज कप्तान मेग लेंनिंग अंतिम ग्यारह का हिस्सा नहीं बन सकीं. फिर भी इस टीम को एक बार भी उनके न होने की कमी नहीं खली.

क्रिकेट के जानकार इन दोनों टीमों के प्रदर्शन में बड़े अंतर के पीछे कई वजह मानते हैं. इनके मुताबिक जहां भारत में महिला घरेलू क्रिकेट पर न के बराबर ही ध्यान दिया जाता है वहीं ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं के लिए अंडर-19, अंडर-16 स्तर पर टी20 और वनडे के बड़े टूर्नामेंट आयोजित किए जाते हैं. वहां महिलाओं के लिए आईपीएल जैसा टूर्नामेंट बिग बैश भी शुरू हो चुका है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेटर अपने देश में सबसे ज्यादा सेलरी पाने वाली महिला खिलाड़ी भी हैं. भारत में बीसीसीआई ने 2015 में महिला क्रिकेटरों के साथ अनुबंध की व्यवस्था शुरू की थी लेकिन इसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं किए गए हैं.

बहरहाल, आज के मैच की बात करें तो जानकार मिताली राज और उनकी टीम को अपनी उन सभी कमियों को पूरी तरह से दूर करने की सलाह देते हैं, जो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पिछले मैच में की थीं. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पिछले मैच में भारतीय टीम की सबसे बड़ी कमी उसकी बल्लेबाजी में नजर आई थी. इस मैच में सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना के जल्द आउट होने के बाद कप्तान मिताली राज और पूनम राउत ने दूसरे विकेट के लिए 157 रन की साझेदारी की थी. लेकिन, इसके बावजूद इन दोनों ने इतनी धीमी गति से रन बनाए थे कि भारतीय टीम महज 226 का स्कोर ही खड़ा कर सकी थी. इस मैच में भारतीय बल्लेबाजों ने 159 डॉट बॉल खेली थीं.

क्रिकेट विशेषज्ञों की मानें तो अगर भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आज के मैच में जीतना चाहता है तो उसे कम से 280 का लक्ष्य देना ही पड़ेगा. हालांकि, वे आज के मैच में भारतीय टीम द्वारा ऐसा करने की उम्मीद भी कर रहे हैं क्योंकि पिछले मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ उसके मध्यक्रम ने तेजी से रन बनाते हुए 265 रनों का स्कोर बनाया था.

भारतीय टीम की दूसरी चिंता उसकी सलामी बल्लेबाजी है. शुरुआती दो मैचों में स्मृति मंधाना ने शानदार पारियां खेली थीं. लेकिन इसके बाद पांच मैचों में वे दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाई हैं. जबकि, दूसरी सलामी बल्लेबाज पूनम राउत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक लगाने के बाद भी पूरी तरह लय में नहीं नजर आ रही हैं.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पिछले मैच में भारतीय गेंदबाज भी फीके साबित हुए थे. इस मैच में 45 ओवरों की गेंदबाजी में भारतीय गेंदबाज केवल एक विकेट ही हासिल कर पाए थे. ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने जिस आसानी से भारतीय स्पिनरों को खेला उससे साफ़ पता चलता है कि उन्होंने इसके लिए काफी होमवर्क किया था. ऐसे में भारतीय गेंदबाजों खासकर स्पिनरों को भी आज के मैच में कुछ विशेष करने की जरूरत है.

क्रिकेट विशेषज्ञों की मानें तो भारतीय टीम के लिए इस मैच में अच्छी बात यह है कि यह मैच डर्बी के उस मैदान पर हो रहा है जहां उसने अपने सभी चार मैच जीते हैं. उधर, ऑस्ट्रेलियाई टीम इस विश्वकप में डर्बी की पिच पर अपना पहला मैच खेलने उतरेगी. डर्बी की पिच भारतीय गेंदबाजों के साथ-साथ भारतीय बल्लेबाजों को भी काफी रास आ रही है. भारत ने जो चार मैच इस मैदान पर खेले हैं उनमें कुल 49 विकेट गिरे जिनमें से 65 फीसदी विकेट भारतीय गेंदबाजों ने हासिल किए हैं.

यही नहीं, इन मैचों में कुल 12 अर्धशतक लगे हैं जिनमें से आठ भारतीय बल्लेबाजों ने लगाए हैं. डर्बी के मैदान पर ऐसे प्रदर्शन के कारण ही कप्तान मिताली राज को भी सबसे ज्यादा उम्मीद इस मैदान से ही दिखती है. कप्तान के लिए एक राहत की खबर यह भी है कि पिछले मैच में उसकी मध्यक्रम की रीढ़ मानी जाने वाली बल्लेबाज हरमन प्रीत कौर और वेदा कृष्णमूर्ति ने अर्धशतक लगाकर फॉर्म में आने का संकेत दे दिया है.

ऑस्ट्रेलियाई टीम

इस विश्व कप में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है कि उससे उसकी कमी बता पाना आसान नहीं लगता. वह इस टूर्नामेंट में केवल एक मुकाबला (इंग्लैंड से) हारी है और वह भी मात्र तीन रन से. ऑस्ट्रेलिया टीम ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनों में जिस तरह का प्रदर्शन किया है उससे यह टीम सबसे ज्यादा संतुलित नजर आती है. इस विश्वकप में इलैसी पैरी, निकोल बोल्टन और कप्तान लेंनिंग ने मिलकर 85 से ज्यादा के औसत से 1000 से ज्यादा रन बनाए हैं जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इसके अलावा मध्यक्रम में बेथ मूनी, एलेक्स ब्लैकवेल और एलिसा हिली लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं.

ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है. अब तक हुए सात मैचों में उसके गेंदबाज तीन बार विपक्षी टीम को आलआउट कर चुके हैं, जबकि बचे हुए पांच मैचों में वे हर बार सात या उससे ज्यादा विकेट लेने में कामयाब हुए हैं. उसकी प्रमुख गेंदबाज मेगन शट, जेस जोनसन, क्रिस्टन बीम्स, इलैसी पैरी और एशले गर्डनर कहीं से भी कमतर नहीं नजर आतीं.