ब्रिटेन के डर्बी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया सेमीफाइनल मुकाबला वैसा बिलकुल भी नहीं हुआ इसके जैसा होने के कयास लगाए जा रहे थे. काउंटी क्रिकेट मैदान पर मिताली राज के नेतृत्व वाली भारतीय टीम खेल के हर विभाग में ऑस्ट्रेलिया से इक्कीस साबित हुई. नतीजतन भारत ने ऑस्ट्रेलिया को यह मैच 36 रनों से हरा दिया.

इससे पहले बारिश से बाधित मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय किया. हालांकि, उसकी शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसकी सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना पहले ही ओवर में अपना विकेट गंवा बैठीं. सलामी बल्लेबाज पूनम राउत भी कुछ ख़ास नहीं कर सकी और मैच के नौवें ओवर में गार्डनर की गेंद पर बेथ मूनी को कैच थमा बैठीं. इसके बाद कप्तान मिताली राज और हरफनमौला हरमन प्रीत कौर ने पारी को संभाला और तीसरे विकेट के लिए 66 रन की साझेदारी की.

मैच के 24वें ओवर में मिताली राज के आउट होने के बाद लगा कि कहीं भारतीय टीम दबाव में ढह ना जाए. लेकिन, इसके बाद हरमनप्रीत ने आगे आकर मोर्चा संभाला और एक ऐसी पारी खेली जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा. उन्होंने 115 गेंदों में 20 चौकों और सात छक्कों की मदद से नाबाद 171 रन बनाए. यह उनकी तेजतर्रार पारी ही थी जिसकी मदद से भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के सामने निर्धारित 42 ओवर में 4 विकेट पर 281 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा कर पाई. इस शानदार पारी के लिए हरमनप्रीत कौर को इस मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया.

ऑस्ट्रेलिया की ओर से इस मैच में गेंदबाज मेगन शट, क्रिस्टन बीम्स, एलिस वल्लिन और एशले गर्डनर ने एक-एक विकेट लिया.

दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया की ओर से निकोल बोल्टन और बेथ मूनी ने पारी की शुरुआत की. लेकिन, दूसरे ही ओवर में मूनी को तेज गेंदबाज शिखा पांडेय ने क्लीन बोल्ड कर दिया. पारी को आगे बढाने आईं ऑस्ट्रेलियाई कप्तान लेनिंग को अनुभवी झूलन गोस्वामी ने बिना खाता खोले पैवेलियन भेज दिया. शुरुआत में ही तीन विकेट गिरने के बाद इलैसी पैरी और एलिस वल्लिन ने पारी को संभाला और चौथे विकेट के लिए 105 रनों की साझेदारी कर टीम का स्कोर 126 तक पहुंचा दिया.

लेकिन, 23वें ओवर में एलिस वल्लिन के 75 रन पर आउट होने के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम दबाव में बिखर गयी. एक समय ऑस्ट्रेलियाई टीम की हालत यह हो गई थी कि मात्र 169 रन पर उसके नौ बल्लेबाज पैवेलियन लौट चुके थे. इसके बावजूद उपकप्तान एलेक्स ब्लैक बेल ने हार नहीं मानी और एक छोर से धुंआधार पारी खेलती रहीं. उनकी 90 रनों की पारी ने ही ऑस्ट्रेलिया को 245 रनों के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा दिया.

भारत की ओर से स्पिनर दीप्ति शर्मा ने तीन जबकि, तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी और शिखा पांडेय ने दो-दो विकेट लिए. स्पिनर राजेश्वरी गायकवाड और पूनम यादव को एक विकेट मिला.

इस जीत के साथ ही भारतीय टीम विश्व कप के फाइनल में पहुँच गई है. वह दूसरी बार विश्वकप के फ़ाइनल में पहुंची है, इससे पहले वह 2005 में इस टूर्नामेंट के फ़ाइनल में पहुंची थी. रविवार 23 जुलाई को होने वाले फ़ाइनल मुकाबले में उसका सामना इंग्लैंड से होगा. भारतीय टीम लीग मैच में इंग्लैंड को शिकस्त दे चुकी है. ऐसे में जानकार फ़ाइनल मुकाबले में उसका पलड़ा इंग्लैंड से भारी मान रहे हैं.

क्रिकेट विश्लेषक मानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया जैसी सबसे मजबूत टीम को हराकर भारतीय टीम इस विश्वकप में उसे मिलने वाली सबसे बड़ी चुनौती को पार कर चुकी है. ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ मैच में उस पर ज्यादा दवाब नहीं होगा.

ऑस्ट्रेलियाई टीम दुनिया की सबसे मजबूत टीम मानी जाती है वह अब तक कुल आठ बार विश्वकप के फ़ाइनल में पहुंच चुकी है. इनमें से छह बार उसने फ़ाइनल जीता है. गुरूवार के मैच से पहले महिला वनडे क्रिकेट में भारत 42 बार ऑस्ट्रेलिया से भिड़ चुका था जिसमें उसे केवल आठ बार ही जीत हासिल हुई थी.