राष्ट्रपति का चुनाव रामनाथ कोविंद आसानी से जीत गए लेकिन इसने देश के कई बड़े नेताओं के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. चुनाव में जबरदस्त क्रॉस वोटिंग हुई जिसने कांग्रेस, भाजपा से लेकर शिवसेना के नेताओं की चिंता बढ़ा दी है.

गुजरात में कांग्रेस के 11 विधायकों ने एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को वोट दिया. ये सभी शंकर सिंह वाघेला के समर्थक माने जाते हैं. वहां विधानसभा चुनाव तो इसी साल होने ही हैं, उससे पहले गुजरात के विधायकों को राज्यसभा चुनाव में वोट डालना हैं. कांग्रेस के प्रभावशाली नेता और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल का राज्यसभा में कार्यकाल पूरा हो रहा है. गुजरात से ही वे चुनकर राज्यसभा आए थे और कांग्रेस इस बार भी अहमद पटेल को ही गुजरात के राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाएगी. लेकिन राष्ट्रपति चुनाव की तर्ज पर अगर 11 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग कर दी तो पटेल चुनाव हार सकते हैं.

गोवा में भी बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग की खबर है. गोवा में भाजपा गठबंधन के पास 21 विधायकों का समर्थन है और कांग्रेस के 17 विधायक हैं. लेकिन वहां से मीरा कुमार को सिर्फ 11 विधायकों के वोट ही मिले. कांग्रेस के बाकी विधायकों ने रामनाथ कोविंद को अपनी पसंद बता दिया. इससे कांग्रेस नेतृत्व परेशान है और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर खुश.

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए भी राष्ट्रपति चुनाव एक बड़ी चुनौती लेकर आया है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने दावा किया कि भाजपा के दस विधायकों ने अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को अपना वोट दिया. जब भाजपा ने अपना हिसाब लगाया तो उन्हें 10 नहीं पांच वोट कम मिले थे. लेकिन इसका भी मतलब है यही कि कांग्रेस ने राजस्थान में भाजपा के घर में सेंध लगा दी है.

परेशान होने वाली खबर शिवसेना सुप्रीम उद्धव ठाकरे के लिए भी है. महाराष्ट्र में कुल 287 वोट पड़े और दो विधायकों के वोट अयोग्य करार दिए गए. बाकी 285 वोट में से एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को 208 विधायकों के वोट मिले जबकि विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को सिर्फ 77 वोटों से संतोष करना पड़ा. भाजपा और शिवसेना के विधायकों की संख्या जोड़ें तो आंकड़ा 185 पहुंचता है, जबकि एनडीए उम्मीदवार को वोट मिले 208. यानी रामनाथ कोविंद के पक्ष में 23 वोट ज्यादा पड़े. इन आंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के विधायकों ने जबरदस्त क्रॉस वोटिंग की.

महाराष्ट्र में रामनाथ कोविंद को मिले 208 वोटों में से अगर शिवसेना के 63 विधायकों को घटा दें तब भी भाजपा के पास 145 वोट बच जाते हैं. यही महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा भी है. इसी नए हिसाब से उद्धव ठाकरे थोड़े परेशान होंगे. क्योंकि इस नए समीकरण के मुताबिक मुश्किल वक्त में कांग्रेस और एनसीपी के कुछ विधायक भाजपा सरकार का साथ देकर भाजपा के लिए उनकी जरूरत खत्म कर सकते हैं.

बिहार में थोड़ी असहजता नीतीश कुमार और भाजपा नेताओं को भी हुई होगी. बिहार में भाजपा और जेडीयू दोनों ही उम्मीद कर रहे थे कि लालू यादव की पार्टी के कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग करेंगे और रामनाथ कोविंद का साथ देंगे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. लालू की पार्टी इस मुश्किल वक्त में भी उनके साथ है और इस एकता ने नीतीश कुमार को साफ सिग्नल दे दिया.

इसके उलट उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और मायावती की पार्टी में अब भी गड़बड़ चल रही है. उत्तर प्रदेश में विपक्ष के करीब नौ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की और मीरा कुमार की जगह रामनाथ कोविंद को वोट दिया. ऐसा सिर्फ राज्यों की विधानसभाओं में ही नहीं हुआ.

संसद में भी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग हुई. लेकिन ये थी बिलकुल अलग तरह की. यहां 21 सांसदों के वोट अयोग्य करार दिए गए. वोटों की गिनती करने वाले एक अधिकारी के मुताबिक इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के वोट अयोग्य घोषित होना एक असाधारण बात है. खासकर जिस अंदाज़ में इन अयोग्य बैलेट पत्रों पर सांसदों ने वोटिंग की थी वह बेहद चौकाने वाला था: किसी ने बैलेट पेपर पर कुछ नहीं लिखा था तो किसी ने दोनों ही उम्मीदवारों को वोट दे दिया था. और कहीं पर वोट देकर काट दिया गया था. इसलिए विपक्ष को अपने विधायकों के अलावा सांसदों की भी चिंता करनी होगी.

राष्ट्रपति के चुनाव में विधायक और सांसद वोटर होते हैं और पार्टी लाइन को मानना इनकी बाध्यता नहीं होती. वे जिसे चाहें अपना वोट दे सकते हैं. इसलिए क्रॉस वोटिंग करने वाले नेताओं की सदस्यता पर किसी तरह का खतरा नहीं होता.लेकिन उनकी अंतरात्मा की आवाज़ पार्टी के लिए जरूर खतरे की घंटी बजा रही है.