24 जून को जब इंग्लैंड में महिला विश्वकप शुरू हुआ तो दुनिया भर के क्रिकेट के पंडित केवल एक ही राग गा रहे थे कि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड में से ही कोई दो विश्व कप के फाइनल में पहुंचेंगे. इन तीनों को महिला क्रिकेट के ‘बिग थ्री’ के नाम से भी जाना जाता है. इसके पीछे कई कारण हैं लेकिन, सबसे बड़ा कारण महिला क्रिकेट में अब तक केवल इन तीनों के ही विश्वकप जीतने को माना जाता है.

लेकिन, इस बार के विश्वकप में मिताली राज की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने इन तीनों के वर्चस्व को जबर्दस्त चुनौती दी. उसने न सिर्फ पहले मैच में इंग्लैंड को हराया बल्कि बिग थ्री के दो सदस्य न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया को विश्वकप से बाहर करने में मुख्य भूमिका निभायी. आज फाइनल में उसके सामने एक बार इस ग्रुप का तीसरा सदस्य इंग्लैंड है.

आज होने वाले फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों को देखें तो अधिकांश लोग इंग्लैंड का पलड़ा भारी बता रहे हैं. इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण महिला क्रिकेट के इतिहास में इंग्लैंड के प्रदर्शन को माना जाता है. 1973 में पहली बार महिला विश्वकप का आयोजन हुआ था तब से लेकर 2013 तक 10 बार यह टूर्नामेंट आयोजित हो चुका है. इसमें इंग्लैंड छह बार फ़ाइनल में पहुंचा और उसने तीन बार इसे जीता भी. पिछली दोनों बार यानी 1993 और 2009 में फाइनल में पहुंचने के बाद उसने इस मुकाबले को जीता ही है.

विश्व कप के इतिहास में इंग्लैंड के साथ एक बड़ा तथ्य यह भी जुड़ा है कि इस विश्वकप से पहले तक उसकी धरती पर खेले गए सभी दोनों विश्वकप फाइनल उसने जीते हैं. वनडे ही नहीं टी20 विश्वकप में भी इंग्लैंड का दबदबा बना हुआ है. पांच टूर्नामेंट में से वह तीन में फाइनल में पहुंचा जिसमें एक बार वह चैंपियन भी बना.

विश्वकप के अलावा भी अगर पिछले पांच साल के आंकड़ों को देखें तो इन सालों में इंग्लैंड ने 15 एक दिवसीय द्विपक्षीय सीरीज खेली हैं जिनमें से उसने 13 में फतह हासिल की है. इससे इंग्लैंड की टीम की मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है.

इस विश्वकप में भी पहला मुकाबला भारत से हारने के बाद उसने अब तक लगातार सात मुकाबले जीते हैं. इस टूर्नामेंट में बल्लेबाजी इंग्लैंड की सबसे बड़ी मजबूती बनकर सामने आई है. पिछले सात मैचों में से उसने तीन में पहले बल्लेबाजी की है और इसमें उसने दो बार 370 से ज्यादा का स्कोर बनाया है. ये दोनों ही स्कोर विश्वकप के इतिहास में सबसे बड़े स्कोर हैं. इंग्लैंड की एक ख़ास बात यह भी है कि उसके शुरूआती पांच बल्लेबाज जबर्दस्त फॉर्म में हैं और अब तक इस विश्वकप में 300 से ज्यादा रन बना चुके हैं.

इंग्लैंड के बाद अगर भारतीय टीम की बात करें तो जहां इतिहास इंग्लैंड के पक्ष में दिखता है तो वर्तमान भारत की जीत की गवाही देता नजर आता है. अगर केवल इतिहास को ही देखें तो हर कोई पहली नजर में मिताली की टीम की दावेदारी को खारिज कर सकता है. अभी तक भारतीय टीम केवल एक बार 2005 में ही विश्वकप के फाइनल में पहुंची है साथ ही वह अब तक आईसीसीसी का कोई भी टूर्नामेंट नहीं जीत सकी है. इस बार भी वह 12 साल बाद आईसीसीसी के किसी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुँचने में कामयाब हो सकी है. भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक हुए कुल एकदिवसीय मुकाबलों की बात करें तो इसमें भी आंकड़े भारतीय टीम के विपरीत ही रहे हैं.

लेकिन, इन आंकड़ों से अलग अगर वर्तमान को देखें तो पिछले एक साल में भारतीय टीम ने आश्चर्यजनक प्रदर्शन किया है. पिछले साल फरवरी से लेकर अब तक भारतीय महिला टीम कोई भी वनडे सीरीज नहीं हारी है. उसने पहले श्रीलंका और वेस्टइंडीज को 3-0 से श्रंखलाएं हरायीं फिर एशिया कप के सभी मैच जीतकर इस कप पर कब्जा जमाया. इसके बाद उसने विश्वकप क्वालीफायर टूर्नामेंट के सभी मैच जीते और फिर इस साल मई में खेली गई चार देशों की वनडे सीरीज भी अपने नाम की. इसी दौरान उसने लगातार 16 वनडे मैच जीतने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया. इस विश्वकप को देखें तो इसके फाइनल में वह कोई आसान डगर चलकर नहीं पहुंची है. उसने दुनिया की सबसे ताकतवर टीम ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को मात दी है. साथ ही अभी तक इस विश्वकप में इंग्लैंड की टीम केवल एक ही मैच हारी है और उसे हराने वाला कोई और नहीं भारत ही है.

हालांकि, भारतीय टीम को करीब से देखने वाले जानकार टीम में अचानक आए इस बड़े बदलाव के लिए मिताली राज और झूलन गोस्वामी को मुख्य वजह मानते हैं. इन लोगों के मुताबिक ये दोनों पिछले दो साल से केवल इस विश्वकप के लिए एक बेहतरीन टीम की तलाश में ही लगी हुई थीं. यह इनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज जो टीम विश्व कप के फाइनल में है वह भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में अब तक की सर्वश्रेष्ठ टीम है. इन दोनों ने एक ऐसी टीम तैयार की है जिसका हर खिलाड़ी मैच विनर है. हर मैच में एक अलग खिलाड़ी मैच विनर बनकर सामने आता है.

बल्लेबाजी में स्मृति मधाना, पूनम राउत, दीप्ति शर्मा, मिताली राज, हरमन प्रीत कौर और वेदा कृष्णमूर्ती ने अपनी जिम्मेदारी का भरपूर निर्वाह किया है. गेंदबाजी में अनुभवी तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी की अगुवाई में तेज गेंदबाज शिखा पाण्डेय, युवा एकता विष्ट, दीप्ति शर्मा, राजेश्वरी गायकवाड और पूनम यादव गेंदबाजी की कमान संभाले हुए हैं. अभी तक हुए मैचों में दीप्ति, एकता और पूनम की स्पिन गेंदबाजी के सामने किसी भी टीम के बल्लेबाज खुलकर नहीं खेल सके हैं. ये तीनों शुरू से ही विश्वकप के 10 प्रमुख गेंदबाजों में जगह बनाए हुए हैं.

सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से जीतने के बाद कप्तान मिताली राज ने कहा था कि यह विश्वकप खिताब न केवल उनके और झूलन गोस्वामी के लिए अलग मायने रखता है बल्कि इससे भारत में महिला क्रिकेट की तक़दीर भी बदलगी. साफ है कि ऐसे में भारतीय टीम के लिए यह जीत एक विश्वकप जीतने से कहीं ज्यादा मायने रखती है.