सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन और पूर्व सचिव निरंजन शाह को 26 जुलाई को होने वाली बोर्ड की विशेष आम सभा में शा​मिल होने से रोक दिया है. बोर्ड की यह बैठक क्रिकेट प्रशासन में लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू करने के लिए बुलाई गई है. शीर्ष अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि इस बैठक में केवल राज्य संघों के पदाधिकारी ही भाग ले सकते हैं.

अदालत में सोमवार को प्रशासकों की समिति (सीओए) के वकील ने इन दोनों के बोर्ड की कार्यवाही में भाग लेने का विरोध किया. सीओए ने अदालत को दी अपनी रिपोर्ट में पहले भी बताया था कि लोढ़ा समिति के अनुसार अयोग्य ठहरा दिए गए लोग पिछले दरवाजे से आकर सुधार लागू करने में रोड़ा अटका रहे हैं. वहीं एन श्रीनिवासन के वकील कपिल सिब्बल ने उनके बैठक में भाग लेने से रोकने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि कोई भी नियम किसी प्रतिनिधि को बैठक में हिस्सा लेने से नहीं रोकता.

इसके अलावा, इस मामले में न्याय मित्र बनाए गए गोपाल सुब्रमण्यम ने भी श्रीनिवासन के रवैए की आलोचना की. उन्होंने कहा कि उन्होंने बैठक का ज्यादातर हिस्सा लोढ़ा समिति की सिफारिशों का विरोध करने में बर्बाद किया. सुब्रमण्यम ने कहा कि इस समिति की सिफारिशें लागू करने का फैसला खुद सुप्रीम कोर्ट का है.

सभी पक्षों को सुनने के बात जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सभी लोग लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर सहमति बनाने की पूरी कोशिश करें. हालांकि अदालत ने कहा कि वह इस रिपोर्ट के ऐतराज जताने वाले पहलुओं की दोबारा समीक्षा करने को तैयार है. बीसीसीआई के कई अधिकारियों को ‘एक राज्य, एक वोट’, पांच के बजाय सिर्फ तीन चयनकर्ता रखने और टेस्ट खेल चुके लोगों को ही चयनकर्ता बनाने जैसी सिफारिशों पर आपत्ति है.