भारत और श्रीलंका के बीच आज से शुरू हो रही टेस्ट सीरीज की सबसे ख़ास बात यह है कि दोनों ही टीमों में इतना बड़ा फर्क पिछले दो दशकों में कभी देखने को नहीं मिला. 1993 से लेकर 2015 तक यानी अर्जुन रणतुंगा के दौर से लेकर कुमार संगकारा के वक्त तक कभी भी श्रीलंका की टीम इतनी कमजोर नहीं नजर आई जितनी वह आज दिखती है. लगभग दो दशक लंबे इस वक्त के दौरान हुए किसी भी मैच में विपक्षी टीम के साथ-साथ क्रिकेट विश्लेषकों ने भी कभी इसे हल्के में लेने की भूल नहीं की.

लेकिन, आज से शुरू हो रही टेस्ट सीरीज में ऐसा नहीं है. आज लगभग सभी विश्लेषक भारतीय टीम के पक्ष में इस सीरीज का एकतरफा परिणाम आने की बात कह रहे हैं. दोनों टीमों की तुलना करने पर यह काफी हद तक सही भी नजर आता है. भारत और श्रीलंका की जो टीमें गाले के मैदान पर खेलने उतर रही हैं उनमें कहीं से भी बराबरी नजर नहीं आती. एक टीम टेस्ट में पहले पायदान पर है तो दूसरी सातवें पर.

अपने दिग्गज खिलाड़ियों के जाने के बाद से अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही श्रीलंकाई टीम की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने 15 दिन पहले ही अपने घर में टेस्ट खेलने वाली टीमों में दुनिया की सबसे कमजोर मानी जाने वाली जिंबाब्वे के हाथों वनडे सीरीज गंवाई. श्रीलंकाई क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ. इसके बाद जिंबाब्वे के साथ ही श्रीलंका ने एक टेस्ट मैच भी खेला. इसमें भी जीत के बावजूद उसकी स्थिति काफी कमजोर नजर आई. इस मैच के पांचवें दिन मैच खत्म होने से दो घंटे पहले तक यह नहीं कहा जा सकता था कि ये मैच किस ओर जाएगा.

भारत के खिलाफ इस मैच में उतर रही श्रीलंकाई टीम को देखें तो यह एक ऐसी टीम है जिसके कोच ने चैंपियंस ट्रॉफी के बाद टीम छोड़ दी. जिम्बावे से हारने के बाद एंजेलो मथ्यूज ने कप्तानी छोड़ दी थी. इसके अलावा बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी, यह टीम कहीं से भी संतुलित नहीं नजर आती. बल्लेबाजी में टीम के सबसे अच्छे टेस्ट बल्लेबाज दिनेश चांडीमल चोट की वजह से टीम का हिस्सा नहीं हैं. उपल थरंगा, एंजेलो मैथ्यूज और पिछले कुछ मैचों में अच्छा खेल रहे कुशल मेंडिस के अलावा किसी भी बल्लेबाज पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

गेंदबाजी की बात करें तो इसमें टीम की हालत और भी पतली नजर आती है. जिंबाब्वे जैसी टीम ने भी श्रीलंका के सामने टेस्ट मैच की दोनों पारियों में 350 से ज्यादा का स्कोर बना लिया था. गेंदबाजी में श्रीलंका की उम्मीदें स्पिनर और इस मैच में कप्तानी कर रहे रंगना हेराथ से ही होंगी. पिछले दो सालों में श्रीलंका ने जो भी टेस्ट जीते हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रंगना हेराथ की ही रही है. इससे पहले 2015 में भारत के साथ हुई तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में भी श्रीलंका ने एक मैच जीता था जिसकी दूसरी पारी में हेराथ ने सात विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी थी. हेराथ के अलावा 17 मैचों में 79 विकेट लेने वाले ऑफ स्पिनर दिलुरवाना परेरा भी पिछले कुछ समय से प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहे हैं. ऐसे में उनसे भी कुछ उम्मीद की जा सकती हैं.

अगर भारतीय टीम की बात करें तो 2015 में श्रीलंका से सीरीज जीतने के बाद से अब तक वह कोई भी टेस्ट सीरीज नहीं हारी है. वह लगातार सात टेस्ट सीरीज जीत चुकी है और इस दौरान उसने ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों को भी पटखनी दी है. विराट कोहली के नेतृत्व में भारतीय टीम पूरी तरह से संतुलित नजर आती है.

हालांकि, उसके लिए थोड़ी चिंता की बात उसके दोनों सलामी बल्लेबाजों मुरली विजय और केएल राहुल का टीम में न होना हो सकता है. लेकिन, इस मामले में भी जानकार कहते हैं कि शिखर धवन और अभिनव मुकुंद काफी हद तक इन दोनों की भरपाई करने में सक्षम हैं. धवन इस समय बेहतरीन फॉर्म में हैं. इसके अलावा उन्होंने श्रीलंका के पिछले दौरे पर जो एक टेस्ट मैच खेला था उसमें शानदार शतक लगाया था.

गेंदबाजी की बात करें तो इस मोर्चे पर भारतीय टीम इस समय दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण से इक्कीस नजर आती है. मोहम्मद शमी, भुवनेश्वर कुमार और उमेश यादव जहां शुरुआती ओवरों में विकेट लेने में लगातार कामयाब हो रहे हैं वहीं, आर अश्विन और रविंद्र जडेजा के साथ युवा स्पिनर कुलदीप यादव स्पिन गेंदबाजी को और ज्यादा धार देते नजर आते हैं. पिछले हफ्ते श्रीलंकाई बोर्ड एकादश के साथ हुए अभ्यास मैच में कुलदीप ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट लिए थे.

दोनों टीमों की स्थिति पर गौर करने के बाद क्रिकेट के कुछ जानकार कहते हैं कि श्रीलंका को इस मैच में अगर अपने लिए कुछ संभावनाएं बनानी हैं तो बल्लेबाजी में कुशल मेंडिस, उपल थरंगा और एंजेलो मैथ्यूज को बड़ी पारियां खेलनी पड़ेंगी. साथ ही श्रीलंकाई स्पिनर दिलुरवाना परेरा और पिछले हफ्ते जिंबाब्वे के खिलाफ मैच में 11 विकेट लेने वाले रंगना हेराथ को भी बेहतरीन गेंदबाजी करनी होगी.

कुछ जानकारों की मानें तो सबसे ज्यादा अपनी स्पिन गेंदबाजी पर निर्भर श्रीलंका इस मैच में स्पिनरों के लिए मददगार पिच तैयार करा सकता है. लेकिन, जिंबाब्वे से अलग भारत के खिलाफ उसका यह दांव उल्टा ही पड़ेगा क्योंकि उसके ऐसा करने पर इसका सबसे ज्यादा फायदा भारतीय स्पिन तिकड़ी को मिलेगा. इससे भारतीय स्पिनर श्रीलंका के अनुभवहीन बल्लेबाजों के खिलाफ और ज्यादा प्रभावशाली हो जाएंगे.