...तो वो अमिताभ बच्चन से मिली सीख थी जो अनिल कपूर आज भी फिल्मों में जमे हुए हैं!

सभी जानते हैं कि ‘खुदा गवाह’ (1992) के बाद अमिताभ बच्चन ने फिल्मों से ब्रेक ले लिया था. जब पांच साल बाद वापसी की तो ‘मृत्युदाता’, ‘लाल बादशाह’ और ‘हिंदुस्तान की कसम’ जैसी महाफ्लॉप फिल्मों की वजह से उनका एक्टिंग करियर दोबारा शुरू होते ही डूबने की कगार पर पहुंच गया था. सन् 2000 में केबीसी ने उन्हें नहीं बचाया होता तो शायद आज भी वे उसी न्यूयॉर्क शहर में रह रहे होते जहां फिल्मों से लंबा ब्रेक लेने के बाद वे पांच साल तक रहे थे.

हाल ही में अनिल कपूर ने अमिताभ बच्चन के जीवन के इसी हिस्से को याद करते हुए कहा कि अमिताभ बच्चन की सलाह पर ही उन्होंने कभी फिल्मों से ब्रेक नहीं लिया. उनके शब्दों में, ‘अमित जी जब पांच साल का ब्रेक लेकर न्यूयॉर्क में आम जीवन जी रहे थे तो एक बार मैं उनसे मिलने पहुंचा. मैंने उनसे कहा कि मैं पिछले 25 सालों से लगातार काम कर रहा हूं और अब इतना थक चुका हूं कि ब्रेक लेना चाहता हूं. उन्होंने तुरंत मुझसे कहा कि ऐसी गलती अपनी जिंदगी में कभी मत करना. फिल्मों से लम्बी अवधि के लिए दूर होने की सोचना भी मत.’

अमिताभ बच्चन के भुगते इस सच से अनिल कपूर ने फिर ऐसी सीख ली कि न सिर्फ इंडिया वापस लौटते ही तुरंत दो फिल्में और साइन कर लीं, बल्कि 38 साल के हो चुके अपने करियर में आज तक उन्होंने कभी ब्रेक नहीं लिया!

माधुरी दीक्षित का करियर संवारेंगी प्रियंका चोपड़ा!

किसने सोचा था कि कमबैक के बाद से ही ठंडे पड़े माधुरी दीक्षित के करियर को प्रियंका चोपड़ा सहारा देंगी, और इस बहाने हॉलीवुड में अपने पैर थोड़े ज्यादा गहरे जमा लेंगी.

खबर है कि प्रियंका चोपड़ा एक अमेरिकी शो का निर्माण करने वाली हैं जो एक ऐसी बॉलीवुड स्टार के बारे में होगा जो शादी के बाद अमेरिका में बस चुकी है और उसका परिवार आधा हिंदुस्तानी आधा अमेरिकी है. माधुरी दीक्षित ऐसा जीवन जी चुकी हैं इसीलिए इस कॉमेडी शो के लिए उन्हें चुना गया है. इस शो के मार्फत एक विदेशी मुल्क में जाकर बस चुकी बॉलीवुड हीरोइन के शादीशुदा जीवन को दिलचस्प अंदाज में दिखाया जाएगा और माधुरी दीक्षित व उनके पति श्रीराम नेने इसके को-प्रोड्यूसर भी होंगे. ‘बार बार देखो’ फिल्म लिखने वाले श्री राव इस शो को लिखेंगे और प्रियंका चोपड़ा ने उनके अलावा ‘क्वांटिको’ के प्रोड्यूसर को भी इस शो से जोड़ लिया है. प्रियंका चोपड़ा इस पूरे प्रोजेक्ट को सफलता पूर्वक लॉन्च करने के लिए पिछले एक साल से मेहनत कर रही थीं और यह उनकी ही वजह से संभव हुआ है कि ‘क्वांटिको’ प्रसारित करने वाला एबीसी नेटवर्क ही इस शो को भी अमेरिका में प्रसारित करेगा. वाकई, प्रियंका चोपड़ा बधाई की पात्र हैं!


‘मैं अब प्यार करने वाला व्यक्ति नहीं रहा, बल्कि खुद प्यार बन चुका हूं! हालांकि ये भी सच है कि इस किंग ऑफ रोमांस को कॉमेडी फिल्में सबसे ज्यादा पसंद हैं.’

— शाहरुख खान, अभिनेता

फ्लैशबैक | जब एक नाटक के बीच में पृथ्वीराज कपूर ने अपने दादा बन जाने का ऐलान किया

पृथ्वीराज कपूर को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ‘पापा जी’ के नाम से जाना जाता था. उनकी रौबदार आवाज, छह फुट ढाई इंच लंबे व्यक्तित्व और कड़क किरदारों ने भले ही उनकी छवि एक गंभीर मिजाज शख्स की बनाई है, लेकिन असल जीवन में वे एक बेहद मिलनसार व्यक्ति माने जाते थे.

17-18 वर्ष की उम्र में शादी करने वाले पृथ्वीराज 1928 में काम की तलाश में पेशावर से मुंबई आए थे और तब तक वे तीन बच्चों के पिता बन चुके थे. कुछ मूक फिल्मों में काम करने के बाद पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ से उन्हें पहचान मिली और ‘सिकंदर’ (1941) जैसी फिल्मों ने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई.

लेकिन रंगमंच के प्रति समर्पित पृथ्वीराज कपूर ने फिल्मों में सफल होने के दौरान भी थियेटर करना नहीं छोड़ा. 1944 में उन्होंने अपनी नाटक-मंडली ‘पृथ्वी थियेटर्स’ की स्थापना की और शहर-शहर घूमकर नाटकों का मंचन किया. कहा जाता है कि देशभर में घूमकर उन्होंने ढाई हजार से ज्यादा नाटक खेले और सभी में मुख्य नायक बने. ‘मुगले-आजम’ (1960) वाली उनकी जिस आवाज की दुनिया आज भी मुरीद है, उस आवाज को पृथ्वीराज ने इन्हीं नाटकों में तराशा था. इन नाटकों के खत्म हो जाने के बाद वे दरवाजे पर झोली फैलाकर खड़े हो जाते थे और जो पैसा मिलता, उससे न केवल मंडली के चालीस-पचास सदस्यों को तनख्वाह देते बल्कि सामाजिक कल्याण के लिए भी दान किया करते.

एक ऐसे ही नाटक के मंचन के दौरान, जो कि मुंबई के ओपरा हाउस में हुआ था, पृथ्वीराज कपूर ने इंटरवल में ऐलान किया कि वे दादा बन गए हैं. बेबाकी का नमूना देखिए, यह जानकारी देने के साथ ही उन्होंने कहा कि जब राज (कपूर) का जन्म हुआ था तो वे केवल बीस साल के थे और अब जब रणधीर (कपूर) का जन्म हुआ है, तो राज (कपूर) बीस साल का है!

वह शायद उनका इकलौता नाटक था, जिसके इंटरवल में भी दर्शकों ने हंसते हुए तालियां बजाई थीं.