प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भ्रष्टाचार के ख़िलाफ जल्द ही एक और अभियान शुरू कर सकती है. इंडिया टुडे की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने हर मंत्रालय के सतर्कता विभाग से कहा है कि वे अपने विभागों के भ्रष्ट और दागी अफसरों की सूची तैयार करें. इसी तरह की सूची अर्ध सैनिक बलों से भी मांगी गई है.

ख़बर के मुताबिक पांच अगस्त तक सभी मंत्रालयों के सतर्कता विभागों को संबंधित सूची तैयार कर सरकार को देनी है. इस सूची में चिन्हित अफसरों पर 15 अगस्त से कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. संदेह के दायरे में पाए जाने वाले अफसरों के नाम आगे की कार्रवाई के लिए सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) और सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) को भेजे जाएंगे. उन पर सीधे विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है. इसमें जुर्माना वसूलना, पदावनत (डिमोशन) करना या नौकरी से बर्खास्त करने जैसी कार्रवाई शामिल है.

सूत्रों के मुताबिक सूची मुख्य तौर पर सर्विस रिकॉर्ड पर आधारित होगी. सेवा काल में किसी के ख़िलाफ जो शिकायतें की गईं. जिस तरह की जांचें हुईं. उनका आचरण और सरकारी सेवा के प्रति उनकी गंभीरता आदि सभी मापदंडों का सूची तैयार करते समय ध्यान रखा जाएगा. यह भी देखा जाएगा कि कहीं उन्होंने निज़ी फायदे के लिए सरकारी खजाने या उसके हितों को चोट तो नहीं पहुंचाई. इस सूची को सक्षम अधिकारी अनुमोदित करेंगे.

ग़ौरतलब है कि सरकार ने इससे पहले जून के महीने में भ्रष्ट अधिकारियों के ख़िलाफ जांच संबंधी 50 साल पुराने नियमों में भी बदलाव किया था. इनके तहत भ्रष्टाचार के मामलों में जांच पूरी करने के लिए अधिकतम छह महीने की समय सीमा तय की गई है. हालांकि विशेष परिस्थितियों और जायज़ वज़हों से इस समयावधि को थाेड़ा-बहुत बढ़ाने की गुंजाइश भी रखी गई है. लेकिन बढ़ी हुई समयावधि भी छह महीने से ज़्यादा नहीं होगी.