महागठबंधन का साथ छोड़कर भाजपा के साथ नई सरकार बनाने के बाद बुलाई गई पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीतीश कुमार का जोर एक बार फिर भ्रष्टाचार को लेकर कोई समझौता न करने पर था. सोमवार को मीडिया के साथ बातचीत में उनका कहना था, ‘इतने दिनों की राजनीति में हमारा जो काम करने का तौर-तरीका रहा है, उसमें हम समझौता कैसे कर सकते हैं. हमने प्रारंभ से भ्रष्टाचार के खिलाफ सशक्त अभियान चलाया है.’

इस तरह की बात नीतीश कुमार कोई पहली बार नहीं कह रहे हैं. 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही वे लगातार साफ-सुथरी सरकार के जरिए राज्य में सुशासन लाने का दावा करते रहे हैं. लेकिन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वॉच की एक रिपोर्ट उनके दावों पर सवाल खड़ा करती है.

बीते शनिवार को नीतीश कुमार ने मंत्रिपरिषद का विस्तार करते हुए इसमें 27 मंत्रियों को शामिल किया था. नई सरकार में जदयू के 14 और भाजपा के 12 विधायकों को शामिल किया गया. इसके अलावा लोक जन शक्ति (लोजपा) के पशुपति नाथ पारस को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई जो फिलहाल विधानमंडल के सदस्य नहीं हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को मिलाकर नई सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 29 हो गई है.

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक इन 29 मंत्रियों में से 22 (76 फीसदी) ने चुनाव आयोग को सौंपे गए हलफनामे में अपने ऊपर आपराधिक मामला दर्ज होने की बात स्वीकार की है. इनमें से नौ के खिलाफ तो हत्या और अपहरण जैसे गंभीर किस्म के आरोप दर्ज हैं. इससे पहले वाली यानी महागठबंधन की सरकार के 29 मंत्रियों में से 19 (66 फीसदी) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे.

बिहार में 2015 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान सभी पार्टियों के मुद्दों में लोगों को बेहतर कानून-व्यवस्था मुहैया कराना शामिल था. लेकिन जब चुनाव के नतीजे आए तो ये उम्मीदें धूमिल होती दिखीं. इसमें सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरे राजद के 80 में से 49 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से 31 गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं. कुछ वक्त पहले तक राजद के साझेदार रहे जदयू में अपने ऊपर आपराधिक मामले स्वीकार करने वाले विधायकों की कुल संख्या 37 है. इनमें से 24 के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी 1991 के बाढ़ संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में कांग्रेस के स्थानीय नेता सीताराम सिंह की हत्या में शामिल होने का आरोप है. इस बात को उन्होंने चुनाव आयोग को सौंपे गए हलफनामे में भी माना है.

दूसरी ओर, कुछ वक्त पहले तक सूबे में कानून व्यवस्था को लेकर महागठबंधन की सरकार पर निशाना साधने वाली भाजपा में भी 53 में से 34 दागी विधायक हैं. गंभीर किस्म के आपराधिक मामलों का सामना करने वाले विधायकों का आंकड़ा 18 है. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी आईपीसी की धारा 120- बी (आपराधिक साजिश) सहित कई मामलों का सामना कर रहे हैं.

यही वजह है कि राजद लगातार नीतीश कुमार पर हमले कर रहा है. बुधवार को बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का कहना था, ‘नीतीश कुमार के नए मंत्रिमंडल में 75 प्रतिशत मंत्री दागी हैं और उनके मंत्रियों के नाम भी पनामा पेपर्स में शामिल हैं. इस मामले में नीतीश क्यों चुप हैं? हम इसकी जांच की मांग करेंगे.’ साफ है कि नीतीश कुमार आगे भी लगातार इस तरह के सवालों से घिरते रहेंगे.