भारत और चीन के बीच सिक्किम के नज़दीक डोकलाम पठार पर बना गतिरोध नवंबर तक भी खिंच सकता है. सूत्रों के हवाले से द इंडियन एक्सप्रेस ने जो ख़बर दी है उसके मुताबिक इस समस्या के समाधान के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. उसमें एक यह भी है कि सर्दियों का मौसम आने तक इंतज़ार किया जाए.

सूत्रों की मानें तो जब से भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन यात्रा से लौटे हैं तभी से डोकलाम विवाद के समाधान के बारे में उच्च स्तर पर तमाम विकल्पों के बारे में विचार किया जा रहा है. विचार-विमर्श की इस प्रक्रिया में चीन में भारत के राजदूत रहे एक राजनयिक सहित कुछ अन्य विशेषज्ञाों को भी शामिल किया गया है. चूंकि भारत इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है इसलिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.

इनमें पहला विकल्प ये है कि डोकलाम की सुरक्षा का ज़िम्मा भूटान की शाही सेना को ही सौंप दिया जाए. यह इलाका वैसे भी भूटान के ही अधिकार क्षेत्र में आता है. चूंकि भूटान को भारत की ओर से उसकी सुरक्षा का आश्वासन मिला है इसीलिए भारतीय सेना डोकलाम में चीन के सामने खड़ी है. इस विकल्प पर आगे बढ़ने की सूरत में भारतीय सैनिकों की जगह भूटान के सैनिक ले लेंगे. फिर चीन-भूटान की सेनाएं आपसी सहमति से एक साथ पीछे हटेंगी.

इस विकल्प को आजमाए जाने की सूरत चीन की साख भी बची रहेगी. क्योंकि वह लगातार आरोप लगा रहा है कि जिस जगह विवाद है वह भारतीय इलाका नहीं है. इसलिए भारत के दबाव के आगे वह नहीं झुकेगा. हालांकि इस मामले में भारत के लिए ख़तरा यह माना जा रहा है कि चीन के साथ भूटान राजनयिक संबंध स्थापित कर सकता है. जबकि भारत यह कभी नहीं चाहेगा क्योंकि इससे भविष्य में उसे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

लिहाज़ा दूसरा विकल्प ये है कि नवंबर तक सर्दियां आने का इंतज़ार किया जाए. जाड़े के मौसम में डोकलाम जैसी जगह पर किसी भी सेना के लिए टिके रहना खासा मुश्किल है. ऐसे में दोनों सेनाएं मौसम की आड़ में सम्मानित तरीके से चुपचाप पीछे हट जाएंगी. तब तक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन भी हो चुका होगा. इसलिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी अपनी पार्टी में असहज़ स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा.

बहरहाल विकल्प चाहे जो भी इस्तेमाल किया जाए सूत्र एक बात स्पष्ट करते हैं कि चीन को डोकलाम पठार के जंफेरी में सड़क निर्माण की सुविधा नहीं दी जाएगी. ख़ास तौर पर ऐसी सड़क जिस पर वाहन दौड़ सकें. क्योंकि इससे भारत की सामरिक सुरक्षा को चुनौती पैदा होना तय है और यह भारतीय पक्ष को मंज़ूर नहीं.