उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सख़्त कानून लाने पर विचार कर रही है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक यह कानून वैसा ही हो सकता है जैसा महाराष्ट्र का मकोका. अख़बार से बातचीत में राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है.

सूत्रों के मुताबिक नए कानून का नाम उपकोका (उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण कानून) हो सकता है. इसमें भी महाराष्ट्र के कानून की तरह प्रावधान किए जा सकते हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक योगी आदित्यनाथ सरकार का यह क़दम वैसे नया नहीं है. उनसे पहले राज्य की मायावती सरकार ने 2007 में इस कानून की तरफ पहल की थी. उसने विधानसभा में पारित कराकर इस कानून को राष्ट्रपति की मंज़ूरी के लिए भेजा था. लेकिन इसके संभावित दुरुपयोग की आशंका के कारण इसे मंज़ूरी नहीं मिली.

बाद में आगामी लोकसभा चुनाव (2009) के 2008 में माया सरकार ने इस कानून को वापस ले लिया. लेकिन अब जैसा सूत्र बताते हैं, ‘उपकोका लाैट रहा है. बल्कि इस बार इसमें पहले पारित कानून की तुलना में ज़्यादा सख़्त प्रावधान हो सकते हैं.’ यही नहीं इस बार योगी सरकार राज्य के दोनों सदनों से कानून पारित कराएगी. फिर इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. माना जा रहा है कि इस बार कानून के रास्ते में रुकावट नहीं आएगी. क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे मौज़ूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उत्तर प्रदेश से ही ताल्लुक रखते हैं.

हालांकि इस कानून को लेकर कुछ जानकार संशय भी ज़ता रहे हैं. उनके मुताबिक महाराष्ट्र में मकाेका के दुरुपयोग की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं. ख़ास तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ इसके बेज़ा इस्तेमाल के आरोप लगाए जाते रहे हैं. ऐसे में इस संभावना को उत्तर प्रदेश में भी पूरी तरह ख़ारिज़ नहीं किया जा सकता.