‘कांग्रेस के सामने आज अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है.’

— जयराम रमेश, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता

कांग्रेस नेता जयराम रमेश का यह बयान कांग्रेस द्वारा गुजरात के अपने विधायकों को बेंगलुरू भेजने की वजह पूछे जाने पर आया. उन्होंने कहा, ‘यह चुनावी संकट नहीं है. पार्टी बहुत गहरे संकट में है.’ जयराम रमेश ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह अलग तरीके सोचते और काम करते हैं, उनसे मिलने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए पार्टी को सामूहिक प्रयास के साथ काम करना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि इन चुनौतियों से निपटने में कामचलाऊ सोच कारगर नहीं होगी. जयराम रमेश के मुताबिक कांग्रेस को अपने नजरिए में लचीलापन लाना होगा, नहीं तो वह अप्रासंगिक हो जाएगी.


‘जो भाजपा से अलग रहने पर भूमाफिया होता है, वह उससे जुड़ने पर शरीफ और पवित्र हो जाता है.’  

— अखिलेश यादव, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का यह बयान पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं पर तंज करते हुए आया. हाल ही में विधानपरिषद की सदस्यता छोड़कर सपा से भाजपा में शामिल हुए बुक्कल नवाब का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, ‘पता चला है कि उनका जमीन का कुछ मामला था, जिसके लिए दबाव बनाया गया है.’ अखिलेश यादव ने आगे कहा कि जिन्हें पार्टी छोड़कर जाना हो चला जाए, लेकिन बहाने न बनाए, ताकि पता लग सके कि मुश्किल दौर में कौन साथ रहता है. सपा अध्यक्ष का यह भी कहना था कि पार्टी अच्छा काम कर रही है, हाल में बड़ी संख्या में किसानों, महिलाओं और युवाओं ने पार्टी की सदस्यता ली है.


‘जनप्रतिनिधियों के दल बदलने पर दोबारा चुनाव जीतने की शर्त होनी चाहिए.’  

— बिमल जालान, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर

बिमल जालान का यह बयान चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों के दल बदल करने से पड़ने वाले नकारात्मक असर की चर्चा करते हुए आया. उन्होंने कहा कि अगर दल बदलने पर दोबारा चुनाव जीतने की शर्त जोड़ी जाती है तो इससे संविधान में मौजूद मंत्रिमंडल के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत को मजबूती मिलेगी. बिमल जालान ने आगे कहा कि बड़े दलों की तुलना में छोटे दलों के जनप्रतिनिधियों के लिए पार्टी तोड़ना और दूसरे दलों के साथ गठबंधन में शामिल होना ज्यादा आसान होता है. उनके मुताबिक जब ऐसा कोई जनप्रतिनिधि मंत्रिमंडल में शामिल हो जाता है तो वह दबाव डालकर फैसलों को अपने हिसाब से प्रभावित करता है.


‘अगर संविधान से अनुच्छेद-35ए को हटाया गया तो विद्रोह हो जाएगा.’

— फारुक अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री

फारुक अब्दुल्ला का यह बयान जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे से जुड़े अनुच्छेद-35ए पर राज्य के विपक्षी दलों की बैठक के बाद आया. उन्होंने कहा कि लोगों को 2008 में अमरनाथ जमीन विवाद को लेकर रातों-रात खड़े हुए जनांदोलन को नहीं भूलना चाहिए. फारुक अब्दुल्ला ने आगे कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का एजेंडा राज्य के स्वायत्त ढांचे को तोड़ना है और अनुच्छेद-35ए का विवाद उसकी इसी योजना का हिस्सा है. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह अनुच्छेद राज्य के सभी लोगों को सुरक्षा देने से जुड़ा है, चाहे वे जम्मू के हैं या कश्मीर के या फिर लेह या लद्दाख के. फारुक अब्दुल्ला के मुताबिक महाराजाओं के समय में भी राज्य की संस्कृति को बाहरी लोगों से बचाने के लिए ऐसे कदम उठाए गए थे.


‘अपने खेलने की शैली, अक्खड़पन और आत्मविश्वास से विराट कोहली विवियन रिचर्ड्स की याद दिलाते हैं.’

— अरविंद डि सिल्वा, श्रीलंका के पूर्व बल्लेबाज

अरविंद डि सिल्वा का यह बयान कप्तान विराट कोहली की अगुवाई में भारतीय टीम के प्रदर्शन पर आया. उन्होंने कहा, ‘सुनील गावस्कर, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर की तरह भारत में क्रिकेट की सूरत बदलने वाले विराट कोहली के भीतर इसे अगले स्तर तक ले जाने की क्षमता है.’ श्रीलंकाई क्रिकेट टीम की लगातार हार पर अफसोस जताते हुए अरविंद डि सिल्वा ने कहा, ‘लंबे समय के लिए योजना बनाकर उस पर काम करने की जरूरत है. आप सीरीज हारने के तुरंत बाद खिलाड़ियों को हटा या बदल नहीं सकते.’ उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी संभावना वाले श्रीलंकाई खिलाड़ियों को पर्याप्त मौका देना और उनमें आत्मविश्वास जगाना बहुत ज्यादा जरूरी है.