देश के अन्य कई राज्यों की तरह त्रिपुरा में भी आख़िरकार बिना चुनाव के ही भाजपा का खाता खुल गया. नॉर्थ ईस्ट टुडे के मुताबिक राज्य में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के टिकट पर जीते सभी छह विधायक भाजपा में शामिल हो गए हैं.

ख़बर के मुताबिक टीएमसी विधायक- सुदीप रॉय बर्मन, आशीष कुमार साहा, दीबा चंद्र रंगखॉल, बिस्व बंधु सेन, प्रांजित सिंह रॉय और दिलीप सरकार ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौज़ूदगी में भाजपा की सदस्यता ली. इस मौके पर असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्व सरमा, भाजपा की त्रिपुरा इकाई के प्रभारी सुनील देवधर और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बिप्लब देब भी मौज़ूद थे. भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले के पक्ष में सुदीप रॉय ने दलील दी, ‘मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और उसकी सरकार को राज्य से हटाने के लिए हमने यह कदम उठाया है.’

उन्होंने ऐलान किया कि कुछ महीनों के भीतर ही ‘पश्चिम बंगाल से भी कुछ बड़े नेता भाजपा में शामिल होंगे. ताकि वहां से भी वामपंथी ताकतों को उखाड़ फेंकने का सशक्त अभियान शुरू किया जा सके.’ टीएमसी विधायकों के अलावा कांग्रेस विधायक और विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रतनलाल नाथ भी भाजपा में शामिल होने वाले हैं. पर उनका दल-बदल कुछ तकनीकी कारणों से अभी अटक गया है. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘भाजपा का किसी भी स्तर पर माकपा से कोई संबंध नहीं है. हम सब उसके साथ माकपा को राज्य से बेदख़ल करने का काम करेंगे.’

ग़ौरतलब है कि भाजपा ने माकपा के प्रभाव वाले इस राज्य में अब तक कभी चुनावी जीत दर्ज़ नहीं की है. हालांकि इसके बावज़ूद टीएमसी के टिकट पर जीते विधायकों के बलबूते अब वह राज्य विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी बन चुकी है. इस प्रदेश में अगले सात महीने के भीतर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. और भाजपाई रणनीति को देखते हुए साफ है कि वह चुनाव को माकपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला बनाने की कोशिश में है. बल्कि केंद्रीय मंत्री प्रधान तो भरोसा ज़ताते हैं कि राज्य में 2018 में अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा.