गुजरात राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल की जीत पर सस्पेंस बना हुआ है. प्रदेश के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोडवाडिया ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि पार्टी के 43 विधायकों ने पार्टी के प्रत्याशी अहमद पटेल के पक्ष में वोटिंग की है. गुजरात कांग्रेस में हो रही टूट के बीच ये सभी वे विधायक थे जिन्हें बेंगलुरु और फिर गुजरात के ही आणंद स्थित एक रेजॉर्ट में ले जाया गया था.

मोडवाडिया की मानें तो अहमद पटेल की जीत लगभग तय हो चुकी है. क्योंकि उनकी जीत के लिए 44 वोट आवश्यक बताए जा रहे थे जो उन्हें मिल चुके हैं. मोडवाडिया के मुताबिक प्रदेश में जदयू के विधायक छोटू भाई वसावा ने भी कांग्रेस के ही पक्ष में वोट दिया है. उनका यह दावा यह भी है कि भाजपा के कुछ विधायकों ने भी कांग्रेस के पक्ष में मत दिए हैं.

हालांकि पार्टी के बागी नेता शंकरसिंह वाघेला का इस बारे में कुछ और मानना है. उन्होंने एक बयान जारी कर कहा है कि कांग्रेस की हार तय है इसलिए उन्होंने अहमद पटेल को वोट नहीं दिया. वाघेला ने इस बात का अफसोस भी जताया और कहा कि पटेल को 40 वोट भी नहीं मिलेंगे.

गुजरात में यह पहली बार हुआ है जब राज्यसभा की तीन सीटों पर चार प्रत्याशी खड़े हुए हैं. भाजपा की तरफ से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, स्मृति इरानी और बलवंत सिंह मैदान में हैं. जबकि कांग्रेस की तरफ से करीब 20 साल राज्यसभा सदस्य रह चुके अहमद पटेल की दावेदारी है. बलवंत सिंह हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं और इस चुनाव में पटेल के सामने ताल ठोक रहे हैं.

यह राज्यसभा चुनाव काफी दिन से सुर्खियों का विषय बना हुआ है. अहमद पटेल कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार माने जाते हैं और पार्टी में उनकी स्थिति ठीक वैसी है जैसी भारतीय जनता पार्टी में अमित शाह की है. दूसरे शाह और पटेल के बीच व्यक्तिगत नाराजगी की खबरें भी सामने आती रही हैं. ऐसे में पटेल की जीत या हार दोनों ही पार्टियों के लिए नाक का सवाल बन चुकी है.

जानकारों के मुताबिक यह चुनाव प्रदेश में करीब तीन महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को भी प्रभावित करने वाला है. हाल ही में प्रदेश में वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला और उनके समर्थकों के इस्तीफे के बाद प्रदेश में कांग्रेस और भी कमजोर हुई है. दूसरी तरफ पिछले दो सालों में भाजपा ने भी कई तरह के विरोध झेले हैं. इसके चलते स्थानीय चुनावों में पार्टी शहरी सीटें तो बचाने में सफल रही लेकिन ग्रामीण आंचल में उसे शिकस्त का सामना करना पड़ा था.

कुल मिलाकर देखा जाए तो अहमद पटेल की जीत या हार भाजपा के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मनोबल के लिए भी यह बेहद अहम पड़ाव साबित हो सकती है.