गुजरात के ‘बापू जी’ यानी शंकर सिंह वाघेला ने जब पिछले महीने कांग्रेस छोड़ी थी तो उन्होंने किसी भी पार्टी में जाने के संकेत नहीं दिए थे. किसी दूसरे दल में शामिल होने का संकेत उन्होंने अब भी नहीं दिया है. अलबत्ता उनके अब तक के रुख़ और ताज़ा बयान से यह ज़रूर साफ है कि वे दूर रहकर भी भारतीय जनता पार्टी की ही मदद करने वाले हैं. बहुत संभव है आने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में भी.

गुजरात में आठ अगस्त को हुए राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल की जीत के बाद वाघेला ने गुरुवार को पहली बार प्रतिक्रिया दी. डीएनए के मुताबिक उन्होंने कहा है, ‘कांग्रेस ने विधायकों को शराब और शबाब का लालच देकर यह जीत हासिल की है.’ यहां याद दिला दें कि भाजपा ने पटेल के ख़िलाफ वाघेला के समधी बलवंत सिंह राजपूत को उम्मीदवार बनाया था. राजपूत 27 जुलाई को ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे और उन्हें उसी दिन टिकट दे दिया गया.

वाघेला ने राज्य सभा चुनाव में निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाया. द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार उन्होंने कहा है, ‘निर्वाचन आयोग की तो इस चुनाव में कोई भूमिका ही नहीं थी. उसे दख़लंदाज़ी नहीं करनी थी. रिटर्निंग ऑफिसर को इस पर निर्णय लेने का अधिकार था.’ उन्होंने आयोग को चुनौती देते हुए कहा कि उसमें ‘हिम्मत है तो राज्य सभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया का वीडियो सार्वजनिक करे.’

वाघेला के मुताबिक, ‘यह सब (क्रॉस वोटिंग करने वाले दो विधायकों के वोट रद्द होना) कांग्रेस की साज़िश का नतीज़ा है. उसने सब कुछ पहले से सोच रखा था. मतदान के एक दिन पहले पूरी योजना बना ली थी कि किसके वोट को चुनाव आयोग में चुनौती दी जानी है. यही नहीं, आयोग के सामने किस तरह की दलीलें पेश करनी हैं यह भी कांग्रेस ने पहले तय कर लिया था.’ इसके बाद उन्होंने भविष्य की राजनीति के भी संकेत दिए.

उन्होंने कहा, ‘आने वाले दिनों में और कई विधायक कांग्रेस छोड़ने वाले हैं. राज्य सभा चुनाव में जिन कांग्रेसी विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है वे सब भाजपा में शामिल होने वाले हैं. क़रीब 36 विधायक पार्टी से नाराज़ हैं. कांग्रेस अगर अपने 44 विधायकों को बेंगलुरू लेकर न जाती तो 30 से अधिक विधायक पिछले महीने ही पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके होते.’ उनके मुताबिक कांग्रेस ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान गुजरात में हुई क्रॉस वोटिंग को गंभीरता से नहीं लिया. वरना यह स्थिति उसके सामने शायद नहीं आती.’

यहां थोड़ा सा ज़िक्र पिछले एक महीने से गुजरात में चल रही राजनीतिक उठापटक का भी. कांग्रेस से लंबे समय से नाराज़ चल रहे वाघेला ने 21 जुलाई को अपने 77वें जन्म दिन पर पार्टी छोड़ने की घोषणा की. इससे चार दिन पहले 17 तारीख को राष्ट्रपति चुनाव के दौरान गुजरात कांग्रेस के 11 असंतुष्ट विधायकों ने एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद के पक्ष में मतदान किया. वाघेला के कांग्रेस छोड़ने के पांच दिन बाद यानी 26 जुलाई और फिर 27 जुलाई को भी उसके छह विधायक भाजपा में चले गए.

अब तक राज्य विधानसभा में कांग्रेस की सदस्य संख्या 57 से घटकर 51 रह गई थी. अहमद पटेल को राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस का उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा भी हो चुकी थी. उन्हें इस चुनाव में जीतने के लिए 44 वोटों की ज़रूरत थी. लिहाज़ा कांग्रेस ने अपने इतने ही विधायकों को बेंगलुरू के ईगलटन रिजॉर्ट में भिजवा दिया. इन विधायकों को छह तारीख़ को गुजरात लाया गया. एक दिन आणंद के रिजॉर्ट में रखा गया. इसके बाद आठ अगस्त को उन्हें सीधे विधानसभा भेजा गया. राज्य सभा चुनाव में मतदान के लिए.

यहां भाजपा पूरी बिसात बिछा चुकी थी. उसकी कोशिश थी कि वह 44 में से एक विधायक भी अगर तोड़ लेगी तो पटेल चुनाव हार जाएंगे. उसने एक विधायक (भोला भाई गोहिल) को क्रॉस वोटिंग के लिए राज़ी भी कर लिया. उन्होंने की भी लेकिन वे और उनके एक अन्य साथी राघवजी पटेल अतिउत्साह में गलती कर गए. उन्होंने अपना वोट मतदान स्थल पर मौजूद भाजपा नेता को दिखा दिया था. कांग्रेस इसी मौके को ले उड़ी. उसने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत कर दी और नियमों के उल्लंघन की दलील दी.

पार्टी ने आयोग से क्रॉस वोटिंग करने वाले अपने दोनों विधायकों के वोट रद्द करने की मांग कर दी. इसके साथ ही कांग्रेस ने एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के दो में से एक और जद-यू (जनता दल-यूनाइटेड) के इकलौते विधायक को भी पटेल के पक्ष में वोटिंग के लिए मना लिया. इधर आयोग ने भी उसकी मांग को स्वीकार कर लिया. इस तरह पटेल लगातार पांचवीं बार राज्यसभा पहुंचने में सफल हो गए. लेकिन इसके साथ ही उनकी जीत आगामी राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सफलता पर संदेह का आधार भी तैयार कर गई.