आज़ादी के 70वें समारोह से चार दिन पहले शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में एक और ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ. ऐतिहासिक इसलिए क्योंकि इसके साथ ही देश की शासन-व्यवस्था के चार शीर्ष पदों पर एक साथ दक्षिणपंथी कही जाने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेता काबिज़ हो गए हैं. या दूसरे शब्दाें में यह भी कह सकते हैं कि आज़ाद भारत के इतिहास में पहली मर्तबा देश की सत्ता के ‘दक्षिणमुखी’ होने का एक चक्र पूरा हो गया है.

ज़िक्र नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के शपथ ग्रहण समारोह का हो रहा है जो भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं. उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाने वाले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी पहले बिहार के राजभवन और फिर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने से पूर्व भाजपा के ही नेता रहे हैं. समारोह में विशिष्ट अतिथियों की कुर्सियों पर अग्रिम पंक्ति में बैठी लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और केंद्र सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. यानी इन दोनों के रूप में संसद और सरकार के शीर्ष क्रम पर भाजपा के दो अन्य प्रतिनिधि. यानी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और संसद के दोनों सदनों के मुखिया (उपराष्ट्रपति राज्य सभा के सभापति भी होते है) सहित सभी शीर्ष पद अब भाजपामय हो चुके हैं.

कैसे? इसकी एक मिसाल समारोह से पहले भी दिखी. नए उपराष्ट्रपति वेेंकैया नायडू शपथ समारोह से पहले परंपरा का पालन करते हुए सबसे पहले राजघाट गए. महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए. इसके बाद उन्होंने भाजपा के पूर्ववर्ती संगठन- भारतीय जनसंघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय की समाधि पर भी पुष्प चढ़ाए. यहां से उन्होंने उन सरदार वल्लभभाई पटेल की समाधि का रुख़ किया जो थे तो कांग्रेस के नेता लेकिन इन दिनों भाजपा उन्हें अपना आदर्श मानने और बनाने की जोर-शोर से कोशिश करती दिखाई देती है. इन औपचारिकताओं को पूरा करते हुए नायडू राष्ट्रपति भवन पहुंचे जहां उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई.

देश के उपराष्ट्रपति बनने वाले नायडू 13वें शख़्स और भाजपा के दूसरे नेता हैं. उनसे पहले राजस्थान की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री रहे भैराें सिंह शेखावत 2002 से 2007 तक यह पद संभाल चुके हैं. आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले उपराष्ट्रपति नायडू ने पांच अगस्त को हुए चुनाव में संयुक्त विपक्ष के अपने प्रतिद्वंद्वी गोपालकृष्ण गांधी को 244 के मुकाबले 516 वोटों से शिकस्त दी थी. बीते 25 साल में इतने बड़े अंतर से जीतकर उपराष्ट्रपति पद पर पहुंचने वाले 68 वर्षीय नायडू देश के पहले नेता हैं. इससे पहले 1992 में केआर नारायणन को 701 में से 700 वोट मिले थे.