केंद्र सरकार के सामने आर्थिक विकास दर को तेज करने की चुनौती कम होती नजर नहीं आ रही है. शुक्रवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 6.75-7.50 फीसदी की आर्थिक विकास दर की ऊपरी सीमा हासिल कर पाना मुश्किल होगा. डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक इसमें यह भी कहा गया है कि मांग में कमी आने के चलते महंगाई में हुई कमी (अपस्फीति) की वजह से अर्थव्यवस्था दबाव से गुजर रही है और पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रही. सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 0.7 फीसदी की गिरावट आने की आशंका जताते हुए इससे निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति में नरमी लाने और ब्याज दरों में 25-75 बेसिक प्वाइंट के बीच कमी करने की सलाह दी गई है.

हालांकि, आर्थिक सर्वेक्षण में नोटबंदी के फैसले की प्रशंसा की गई है. सर्वेक्षण के मुताबिक इससे भ्रष्टाचार को रोकने के अलावा कर का आधार बढ़ा है और ज्यादा लोग करों का भुगतान करने लगे हैं. वहीं, आर्थिक सुधारों की चर्चा करते हुए कहा गया है कि वस्तु और सेवा कर (जीएसटी), एयर इंडिया के निजीकरण को सैद्धांतिक मंजूरी, तेल सब्सिडी को तार्किक बनाने और बैंकों की बैलेंस शीट सुधारने की कोशिशें भारत में ढांचागत सुधारों की उम्मीद जगाने वाले कदम हैं.

आर्थिक सर्वेक्षण में खुदरा महंगाई के मार्च 2018 तक भारतीय रिजर्व बैंक के चार फीसदी के अनुमान से नीचे रहने की उम्मीद जताई गई है. यह अभी 1.5 फीसदी है. वहीं, राजकोषीय घाटे को लेकर कहा गया है कि यह 2016-17 में 3.5 फीसदी के मुकाबले 2017-18 में 3.2 फीसदी हो जाएगा. हालांकि, इसमें यह उम्मीद जताई गई है कि वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटे को तीन फीसदी तक लाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा.