वृंदावन और देश के अन्य आश्रमों में रहने वाली विधवाओं की दशा सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने का फैसला किया है. शुक्रवार को अदालत ने विधवाओं के लिए पुनर्वास और अन्य उपायों के बारे में सुझाव देने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन करने का निर्देश दिया. यह फैसला करते हुए जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा, ‘संवैधानिक दायित्व के तहत इन बेसहारा विधवाओं की मदद के लिए अदालत का दखल देना और सामाजिक न्याय को ध्यान में रखकर उचित निर्देश देना जरूरी हो गया है.’

वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक अदालत द्वारा गठित इस समिति में एनजीओ जागो-री की सुनीता धर, गिल्ड फॉर सर्विस की मीरा खन्ना, एडवोकेट आभा सिंघल जोशी, हेल्प एज इंडिया और सुलभ इंटरनेशनल द्वारा नामित एक-एक सदस्य और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अपराजिता सिंह शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण और उपभोक्ता संरक्षण मंच की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कदम उठाया है. इसमें उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को वृंदावन की विधवाओं के पुनर्वास के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी उम्मीद जताई कि समाज विधवाओं को लेकर अपना संकीर्ण नजरिया छोड़ देगा. अदालत ने समिति को इस पर भी विचार करने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में केंद्र सरकार से वृंदावन की विधवाओं के पुनर्विवाह को बढ़ावा देने के योजना बनाने का निर्देश दिया था. इससे पहले अप्रैल में विधवाओं के पुनर्वास के लिए उचित कार्ययोजना पेश न करने की वजह से शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की थी. इसके अलावा एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया था.