अपने अटपटे फैसलों से कई फिल्मकारों की आंखों की किरकिरी बन चुके पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है. उनकी जगह जाने-माने गीतकार प्रसून जोशी को नया अध्यक्ष बनाया गया है. मशहूर विज्ञापन एजेंसी मैक्केन वर्ल्ड के सीईओ प्रसून जोशी हिंदी फिल्मों के सफल गीतकार और पटकथा लेखक भी हैं. मैक्केन ने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों के कैंपेन और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों का प्रचार अभियान संभाला है. पिछले आम चुनावों से पहले जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा के उम्मीदवार बने थे तो प्रसून जोशी ने उनके लिए प्रचार गीत भी लिखे थे. मोदी सरकार ने उन्हें 2015 में पद्मश्री से भी नवाजा था.

पहलाज निहलानी को ढाई साल पहले जनवरी 2015 में 23 सदस्यीय सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था. कहा जाता है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समर्थन हासिल था. लेकिन अपनी नियुक्ति से अब तक वे लगातार विवादों में ही रहे. कभी हद से ज्यादा उनके ‘मोदी प्रेम’ ने सरकार की मुसीबतें बढ़ाईं तो उनके अटपटे फैसलों ने फिल्म उद्योग को भी परेशान किया. टाइम्स आॅफ इंडिया के अनुसार पिछले कुछ समय से उन्हें हटाने पर विचार हो रहा था और इस बारे में उन्हें बता भी दिया गया था.

पहलाज निहलानी पर कई फिल्म निर्माताओं का आरोप रहा कि उन्होंने सेंसर बोर्ड को निजी संपत्ति समझा. कइयों ने उन पर ‘नैतिकता का पहरेदार’ होने का आरोप लगाया. बात चाहे अभिषेक चौबे की ‘उड़ता पंजाब’ की हो, मधुर भंडारकर की ‘इंदु सरकार’ की या अलंकृता श्रीवास्तव की ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्क़ा’ की, निहलानी को फिल्मों में बेवजह और अतार्किक काट-छांट करने वाला कहा गया. इसके चलते उनका अक्सर फिल्मकारों से विवाद हुआ. अलंकृता ने तो उनके फैसले को अदालत में चुनौती भी दी जहां सेंसर बोर्ड की हार हुई.