चीन से तनातनी के बीच रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) से आई एक खबर देश में रक्षा अनुसंधान के बुरे हाल की ओर इशारा करती है. केंद्रीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली के अनुसार पिछले साढ़े तीन साल में 143 वैज्ञानिकों ने डीआरडीओ की नौकरी छोड़ दी. उन्होंने बताया कि 2014 में 41, 2015 में 42 और 2016 में 45 वैज्ञानिक डीआरडीओ से अलग हो गए जबकि इस साल जुलाई तक 15 वैज्ञानिकों ने अपनी नौकरी छोड़ी है. हालांकि उन्होंने इन आंकड़ों को बहुत बड़ा नहीं माना.

लोकसभा में शुक्रवार को इस मसले पर अरुण जेटली ने बताया कि डीआरडीओ में वैज्ञानिक ज्यादा दिनों तक क्यों नहीं टिकते, इन कारणों का पता सरकार लगा रही है. यही नहीं, इस संगठन से वैज्ञानिकों को जोड़े रखने के लिए सरकार ने एक व्यापक प्रोत्साहन योजना भी शुरू की है. डीआरडीओ देश का प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान संगठन है. इसका गठन देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया गया था. इसकी अब तक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि अग्नि, पृथ्वी, आकाश जैसे मिसाइलों का विकास रहा है. इससे देश की मारक क्षमता काफी मजबूत हुई. हालांकि आलोचकों का मानना है कि यह उपलब्धि डीआरडीओ के चलते कम और इसरो की तकनीक के चलते ज्यादा संभव हो पाई.