ऐट यानी @ एक ऐसा चिह्न है जिसका सामना किए बिना अगर आप सोचें कि इंटरनेट सर्फिंग कर ली जाए तो यह नामुमकिन ही है. चलिए जानते हैं कि यह ऐट, ऐटमार्क, स्नेल, कर्ल, व्होर्ल या व्हर्लपूल कहा जाने वाला चिह्न कहां से आया और कैसे इंटरनेट का सबसे जरूरी हिस्सा बन गया.

ऐट करीब पांच सौ सालों से प्रयोग में है. शुरूआत में इसे किसी भी वस्तु के एक नग की कीमत बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, यानी ज्यादातर प्रयोग व्यापार का लेखा-जोखा रखने में होता था. और इसका मतलब था - ‘ऐट ईच’ (at each) यानी ‘प्रति एक’. उदाहरण के लिए अगर कहा जाए कि 10 केले @ 1 रुपया, तो इसका मतलब था - एक केला एक रुपए का मिलेगा और दस केलों के लिए दस रुपए का भुगतान करना पड़ेगा. इसीलिए इस चिह्न को ‘ऐट – द रेट’ भी कहते हैं. आधिकारिक कागजातों में तो नहीं, लेकिन आजकल के विज्ञापनों में इसी मकसद से इस चिह्न का उपयोग किया जाता है.

इस चिह्न के बनने की कहानी पर जाएं तो भाषा विकास से जुड़ी एक दिलचस्प जानकारी पता चलती है. दरअसल यह लैटिन भाषा के एक संक्षिप्त शब्द एड (ad) का अपभ्रंश है. एड का मूल शब्द क्या था, यह तो नहीं पता चलता पर इसका मतलब होता था- ‘की ओर.’ उस समय अक्षरों को घुमावदार तरीके से लिखा जाता था. यह तरीका कुछ हद तक कर्सिव राइटिंग से मिलता-जुलता था. इस लिखाई में डी का ऊपरी सिरा कुछ इस तरह मोड़ा जाता था कि वह घूमकर ए के सामने तक पहुंच जाता था.

समय के साथ लिखने के तरीकों में हो रहे लगातार बदलावों के चलते ए और डी का गोलाई वाला हिस्सा एक साथ आ गया. साथ ही इसके ऊपर डी का ऊपरी हिस्सा भी गोलाई में ही पहुंच गया. इसका उच्चारण भी इस समय तक एड से एट और बाद में ऐट किया जाने लगा.

इस चिह्न का सबसे शुरुआती इस्तेमाल फ्रांस, इटली और यूरोप के कुछ और देशों के पुराने दस्तावेजों में मिलता है. 19वीं सदी आते-आते व्यापार में दर बताने वाले इस चिह्न का उपयोग कुछ इस तरह चलन में आया कि पूरी दुनिया में इसे पहचाना जाने लगा. फिर भी इसे शुरुआती टाइपराइटरों में जगह नहीं दी गई थी. हालांकि 1890 में यह टाइपराइटर के कीबोर्ड पर आ तो गया, लेकिन इस्तेमाल में आने वाले चिह्नों में सबसे फिसड्डी ही रहा.

कम्प्यूटरों के आने के बाद, सन 1971 में इस चिह्न ने ऐतिहासिक वापसी की. यह समय इंटरनेट के विकास का शुरुआती चरण माना जा सकता है. अमेरिकन कंपनी बीबीएन टेक्नोलॉजी में काम करने वाले कम्प्यूटर साइंटिस्ट रे टॉमलिंसन जब दो कम्प्यूटरों को कनेक्ट करने की कोशिश कर रहे थे तो उनके सामने एक दिलचस्प समस्या आई. मेल भेजते हुए यूजर के नाम के साथ वे पहचान के लिए जिस भी चिन्ह या शब्द को लिख रहे थे, उसे रिसीव करने वाला कंप्यूटर कुछ और ही पढ़ रहा था. इस एरर से निपटने के लिए रे को सेंडर के नाम के साथ एक ऐसा चिह्न लगाने की जरूरत थी जो ज्यादा इस्तेमाल न किया जाता हो. ऐसे में सबसे कम उपयोग होने वाला चिह्न @ जिसका भाषा-व्याकरण में भी कोई उपयोग नहीं था, यहां पर बड़े काम का साबित हुआ. इस तरह रे ने @ का इस्तेमाल कर दुनिया का पहला मेल भेजा. इस क्रांतिकारी घटना के बाद ऐट और इंटरनेट दुनियाभर में एक-दूसरे के पर्याय बन गए.